भारतीय सेना की ताकत और बढ़ेगी — QRSAM ‘अनंत शस्त्र’ हुआ टेंडर के लिए प्रस्तावित

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BY: Yoganand Shrivastva

भारतीय सेना की वायु रक्षा क्षमताओं में मजबूत इजाफा होने जा रहा है — सेना ने गतिशील ब्रिगेडों और यंत्रीकृत इकाइयों की सुरक्षा के लिए क्विक रिएक्शन सर्फेस-टू-एयर मिसाइल (QRSAM) प्रणाली ‘अनंत शस्त्र’ को शामिल करने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित करने का कदम उठाया है। इस प्रणाली के आने से बीएमपी जैसे पैदल सेना के लड़ाकू वाहन, टैंक और तोपखाने सहित ग्राउंड-फोर्सेज़ को न सिर्फ पारंपरिक हवाई खतरों से बल्कि छोटे हमलावर ड्रोन, हमलावर हेलीकॉप्टर और घूमती हुई हवाई मिसाइलों से भी बचाव मिलेगा। सेना के अनुसार तीन रेजिमेंटों के रूप में तैनाती की योजना है, जिनका उद्देश्य गतिशील युद्ध समूहों को निचले तथा मध्यम ऊँचाई वाले हवाई क्षेत्र (लगभग 10 किमी तक) में सुरक्षा प्रदान करना है — वही क्षेत्र जो मैदानों, पहाड़ियों और तटीय इलाकों में जमीनी बलों के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है।

अनंत शस्त्र को घरेलू तकनीक पर विकसित किया गया है — डीआरडीओ के नेतृत्व में इसे बीईएल और बीडीएल के समन्वय से मेक‑इन‑इंडिया परियोजना के रूप में तैयार किया गया है, ताकि समीक्षा‑अनुकूल, मोबाइल और स्वदेशी समाधान सेना को मिल सके। मोबाइल 8×8 प्लेटफॉर्म पर आधारित यह प्रणाली 360‑डिग्री कवरेज देने वाले आधुनिक रडार, ऑटोमैटेड कमांड‑एंड‑कंट्रोल, और सभी मौसम ट्रैकिंग क्षमताओं से लैस होगी। डिजाइन में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचाव तथा स्वचालित लक्ष्य पृथक्करण जैसी क्षमताएँ शामिल की गई हैं ताकि जटिल और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सटीक निशाना साधा जा सके।

तकनीकी विनिर्देशों के स्तर पर अनंत शस्त्र को 30–40 किमी तक के दायरे में हवाई खतरों को नष्ट करने और 6–10 किमी ऊँचाई तक के लक्ष्यों को बेअसर करने के लिए कहा जा रहा है; इससे लड़ाकू विमान, हमलावर हेलीकॉप्टर, रॉकेट‑प्रकार लक्ष्यों के साथ‑साथ छोटे तथा मध्य आकार के ड्रोन भी प्रभावी रूप से रोके जा सकेंगे। गतिशीलता को प्राथमिकता देते हुए इसे ऐसे प्लेटफॉर्म पर तैनात करने की योजना है जो रेगिस्तान, पहाड़ और मैदान — तीनों तरह के थिएटर में तेज़ी से मूव कर सके।

रणनीतिक महत्व की बात करें तो यह परियोजना भारतीय सेना की बख्तरबंद और यंत्रीकृत संरचनाओं को हवाई खतरे से बचाकर मैकेनाइज़्ड युद्ध समूहों की रणकुशलता बढ़ाने का जरिया बनेगी। लगभग ₹30,000 करोड़ की परियोजना के तहत प्राथमिक तैनाती पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं के संवेदनशील क्षेत्रों में की जानी है। भविष्य की उत्पादन योजना के हिस्से के रूप में नौ इकाइयों (units) का विनिर्माण पूर्वनिर्धारित है, जिनके बराबर 36 मिसाइल और 36 रडार/लॉन्चिंग घटक उपलब्ध कराए जाने की रूपरेखा बताई जा रही है।

इसके आने से सेना को सामरिक लचीलापन तथा आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं में मजबूती मिलेगी — अनंत शस्त्र न केवल आधुनिक युद्धक्षेत्र में सैनिकों को एक ‘आसमानीय ढाल’ प्रदान करेगा, बल्कि यह रक्षा औद्योगिक आधार को भी सुदृढ़ करने और उच्च तकनीक वाली प्रणालियों के स्वदेशी निर्माताओं को बड़े पैमाने पर शामिल करने का मार्ग प्रशस्त करेगा। फिलहाल प्रस्ताव‑प्रक्रिया और टेंडर के अगले चरणों में तकनीकी चयन, उत्पादन‑समर्थता तथा क्षेत्र परीक्षणों की शर्तें तय की जाएँगी, जिनके बाद ही प्रणाली की अंतिम तैनाती और श्रृंखलाबद्ध उत्पादन का रास्ता साफ होगा।

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