रिपोर्ट: विष्णु गौतम, दुर्ग
Mayor Officer Controversy : दुर्ग नगर निगम में महापौर और अधिकारियों के बीच विवाद अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। मामला उरला स्थित एक सरकारी स्कूल में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के भूमिपूजन कार्यक्रम से शुरू हुआ, जिसके बाद विवाद इतना बढ़ा कि अधिकारियों को कथित रूप से कार्यालय में रोकने के आरोप सामने आने लगे।इस पूरे घटनाक्रम के बाद शहर की राजनीति गरमा गई है।

Mayor Officer Controversy : भूमिपूजन कार्यक्रम में शुरू हुआ विवाद
जानकारी के मुताबिक, उरला स्थित सरकारी स्कूल में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए भूमिपूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में गजेंद्र यादव भी शामिल हुए थे।बताया जा रहा है कि महापौर अलका बाघमार कार्यक्रम में देर से पहुंचीं। मंच पर पहुंचते ही उन्होंने अधिकारियों पर नाराजगी जाहिर की।महापौर ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों को समय पर सूचना नहीं दी जाती और अधिकारी केवल औपचारिकता निभाने का काम कर रहे हैं।
Mayor Officer Controversy : मंच से अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए सवाल
कार्यक्रम के दौरान महापौर अलका बाघमार ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार “फोकट का तनख्वाह” नहीं दे रही है।सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र को लेकर भी नाराजगी थी। निमंत्रण पत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा मंत्री का नाम, अध्यक्षता में भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक का नाम और महापौर का नाम विशिष्ट अतिथि के रूप में दर्ज था।इसी बात को लेकर महापौर की नाराजगी बढ़ने की चर्चा है।

Mayor Officer Controversy : अधिकारियों को कार्यालय में रोकने के आरोप
विवाद अगले दिन और बढ़ गया। जानकारी के अनुसार महापौर ने मंडी बोर्ड के एसडीओ प्रवीण पांडे, आरईएस के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जे.के. मेश्राम और एसडीओ सी.के. सोने को अपने कार्यालय बुलाया।बताया जा रहा है कि महापौर ने अधिकारियों से जवाब मांगा और कथित तौर पर कहा कि जवाब दिए बिना कोई बाहर नहीं जाएगा।यह भी आरोप है कि बाहर मौजूद गार्ड को अधिकारियों को बाहर नहीं जाने देने के निर्देश दिए गए थे।
Mayor Officer Controversy : पुलिस पहुंचने के बाद बाहर निकले अधिकारी
स्थिति बिगड़ने पर अधिकारियों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद एडिशनल एसपी, सीएसपी और दो थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे।पुलिस की मौजूदगी में अधिकारियों को कार्यालय से बाहर निकाला गया। घटना के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Mayor Officer Controversy : शहर में गरमाई राजनीति
इस पूरे घटनाक्रम के बाद विपक्ष और राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है। मामले को लेकर प्रशासनिक गरिमा, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और अधिकारियों के सम्मान जैसे मुद्दों पर बहस तेज हो गई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और ज्यादा तूल पकड़ सकता है।
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