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पीएम मोदी का बांसवाड़ा दौरा: जानें क्यों है राजनीतिक रूप से खास

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BY: MOHIT JAIN

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी गुरुवार 25 सितंबर को राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के दौरे पर रहने वाले हैं। यह दौरा केवल विकास परियोजनाओं के शिलान्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने भी हैं। आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में बीजेपी की पकड़ कमजोर हुई थी, जिसे मजबूत करने के लिए पार्टी अब पूरी ताकत झोंक रही है।

पीएम मोदी यहां से 1.08 लाख करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की सौगात देंगे। इनमें 2800 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा परियोजना भी शामिल है, जो दक्षिणी राजस्थान के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है।

क्यों अहम है यह दौरा?

बांसवाड़ा का इलाका गुजरात और मध्यप्रदेश की सीमा से सटा हुआ है और आदिवासी जनसंख्या बहुल है। 2023 के चुनावों में यहां भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए कड़ी चुनौती पेश की थी। इस क्षेत्र में बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक खिसकता नजर आया था।

पीएम मोदी का यह दौरा उसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।

  • विकास का संदेश: नई परमाणु परियोजना और अन्य योजनाओं से आदिवासी क्षेत्र को विकास की नई दिशा देने का प्रयास।
  • राजनीतिक रणनीति: बीएपी के बढ़ते प्रभाव को रोकने और बीजेपी का खोया आधार वापस पाने की कवायद।

परमाणु ऊर्जा परियोजना का महत्व

बांसवाड़ा की माही बजाज सागर परियोजना पहले से ही ऊर्जा उत्पादन में योगदान दे रही है। अब यहां 2800 मेगावाट की नई परमाणु ऊर्जा परियोजना स्थापित होगी। इसका उद्देश्य इस पिछड़े आदिवासी क्षेत्र में रोजगार, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास को गति देना है।

यह परियोजना न केवल क्षेत्रीय राजनीति पर असर डालेगी, बल्कि राजस्थान की ऊर्जा जरूरतों को भी लंबे समय तक पूरा करेगी।

भारत आदिवासी पार्टी की चुनौती

भारत आदिवासी पार्टी ने बीते चुनावों में अप्रत्याशित प्रदर्शन किया।

  • 2018 के बाद से पार्टी का वोट प्रतिशत तीन गुना बढ़ा।
  • बांसवाड़ा लोकसभा सीट बीएपी ने दो लाख वोटों के अंतर से जीती।
  • तीन विधानसभा सीटों पर भी पार्टी ने कब्जा जमाया।

बीजेपी और कांग्रेस के लिए यह नई चुनौती लगातार सिरदर्द बनी हुई है।

पीएम मोदी के दौरे से ठीक पहले, बीएपी सांसद राजकुमार रोत अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और मांगों को लेकर धरना दिया। इससे साफ है कि इस इलाके की राजनीति अभी और गरमाने वाली है।

पीएम मोदी का बांसवाड़ा दौरा केवल योजनाओं के शिलान्यास का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक चुनावी रणनीति भी है। दक्षिणी राजस्थान में बढ़ते बीएपी के प्रभाव को संतुलित करने और आदिवासी मतदाताओं को फिर से आकर्षित करने की कोशिश साफ नजर आती है। आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में इस दौरे का असर देखने को मिल सकता है।

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