Tara Coal Mine को लेकर सरगुजा में एक बार फिर पर्यावरण और वन क्षेत्र से जुड़े सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सुजान बिंद ने तारा क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खनन प्रक्रिया पर रोक लगाने और पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं देने की मांग को लेकर सरगुजा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री समेत संबंधित अधिकारियों के नाम दिया गया है।
Tara Coal Mine: खनन शुरू होने पर 5 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का दावा
Tara Coal Mine को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सुजान बिंद का दावा है कि क्षेत्र में कोयला खनन शुरू होने पर 5 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई की जा सकती है। उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से क्षेत्र के पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
सुजान बिंद ने प्रशासन से मांग की है कि खनन प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले वन और पर्यावरण से जुड़े संभावित प्रभावों को गंभीरता से देखा जाए तथा पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं दी जाए।
Tara Coal Mine: पर्यावरण और जलस्रोतों पर असर की जताई चिंता
Tara Coal Mine के संबंध में सौंपे गए ज्ञापन में पर्यावरण के साथ-साथ क्षेत्र के जलस्रोतों को लेकर भी चिंता जताई गई है। सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि बड़े स्तर पर खनन और पेड़ों की कटाई से प्राकृतिक संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका है।
हसदेव अरंद क्षेत्र में पहले से ही पेड़ों की कटाई और कोयला खनन को लेकर अलग-अलग स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में तारा कोल माइंस को लेकर सामने आई यह आपत्ति भी पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर बहस को आगे बढ़ा रही है।
Tara Coal Mine: हाथियों और अन्य वन्यजीवों के आवागमन पर भी सवाल
Tara Coal Mine को लेकर वन्यजीवों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता ने आशंका जताई है कि खनन और बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से हाथियों समेत अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन पर असर पड़ सकता है।
वन क्षेत्र में मानवीय गतिविधियां बढ़ने से वन्यजीवों के आवास और उनके आवागमन के रास्तों पर प्रभाव पड़ने की चिंता जताई गई है। इसी वजह से सामाजिक कार्यकर्ता ने खनन प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है।
Tara Coal Mine: 1 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रतिबंध को लेकर चिंता
Tara Coal Mine के मामले में 1 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रतिबंध को लेकर भी सामाजिक कार्यकर्ता की ओर से सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित प्रावधानों और प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं दी जाए।
ज्ञापन के जरिए प्रशासन से पूरे मामले की समीक्षा करने और पर्यावरण तथा वन क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई करने की मांग की गई है।
Tara Coal Mine: अडानी कंपनी के CSR कार्यों की जांच की मांग
Tara Coal Mine से जुड़े ज्ञापन में अडानी कंपनी के CSR कार्यों की जांच की मांग भी शामिल है। सामाजिक कार्यकर्ता ने कंपनी की ओर से शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े किए जा रहे कार्यों की जांच की मांग उठाई है।
ज्ञापन में इन कार्यों और उनके दावों की वास्तविक स्थिति की पड़ताल करने की बात कही गई है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
Tara Coal Mine: अब सरकार और प्रशासन के रुख पर नजर
Tara Coal Mine को लेकर 5 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई के दावे, वन्यजीवों की चिंता और पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़े सवाल सामने आने के बाद अब प्रशासन के रुख पर नजर है। सामाजिक कार्यकर्ता ने खनन प्रक्रिया पर रोक लगाने और पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं देने की मांग की है।
अब देखना होगा कि तारा क्षेत्र में प्रस्तावित खनन को लेकर प्रशासन और सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और पर्यावरण तथा वन्यजीवों से जुड़े सवालों पर क्या स्थिति सामने आती है।


