Punpun Ghat Pind Daan: औरंगाबाद जिले के सीरीस स्थित पुनपुन घाट पर पितृपक्ष मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। 15 दिवसीय पितृपक्ष मेले को लेकर देश-विदेश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन यहां पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना को लेकर हिंदू धार्मिक परंपराओं के अनुसार पुनपुन नदी के तट पर पिंडदान कर रहे हैं। इसके बाद श्रद्धालु गया जी के लिए रवाना हो रहे हैं।
Punpun Ghat Pind Daan: आदि गंगा पुनपुन के तट पर हो रहा पिंडदान
धार्मिक मान्यता के अनुसार पुनपुन नदी के तट को मगध क्षेत्र की प्रथम वेदी माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर अपने पितरों के लिए पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि गया जी में पिंडदान और श्राद्ध करने की परंपरा हिंदू समाज में सदियों से चली आ रही है और इसका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है।
श्रद्धालुओं के मुताबिक पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से की जाने वाली इस धार्मिक परंपरा का विशेष महत्व है। उनका मानना है कि समाज के अनेक महापुरुषों और धार्मिक पात्रों ने भी अपने पितरों के मोक्ष के लिए गया क्षेत्र में श्राद्ध और पिंडदान किया था।
Punpun Ghat Pind Daan: भगवान राम से जुड़ी है धार्मिक मान्यता
श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित धार्मिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में भगवान राम ने भी अपने पितरों के मोक्ष के लिए गया क्षेत्र में श्राद्ध किया था। वहीं द्वापर युग से जुड़ी मान्यताओं में महाभारत के बाद पांडवों द्वारा भी अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए गया में पिंडदान किए जाने का उल्लेख मिलता है।
इसी धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों से श्रद्धालु गया क्षेत्र पहुंचते हैं। गया श्राद्ध से पहले पुनपुन घाट पर पिंडदान करने की परंपरा के कारण सीरीस पुनपुन घाट पर भी पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है।
Punpun Ghat Pind Daan: वायु पुराण और पद्म पुराण में भी वर्णन का दावा
धार्मिक ग्रंथों से जुड़ी मान्यताओं में वायु पुराण और पद्म पुराण में भगवान राम के गया श्राद्ध से संबंधित प्रसंगों का उल्लेख बताया जाता है। स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान राम और माता सीता ने गया क्षेत्र की प्रथम वेदी कही जाने वाली आदि गंगा पुनपुन के तट पर अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रथम पिंडदान किया था।
मान्यता के अनुसार पिंडदान के बाद भगवान राम और माता सीता ने उम्गेश्वरी की पर्वत श्रृंखला क्षेत्र में रात्रि विश्राम किया था। स्थानीय लोग इस स्थान को आज सीता थापा के नाम से जानते हैं। यहां माता सीता के हाथ के निशान से जुड़ी धार्मिक मान्यता भी है और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
Punpun Ghat Pind Daan: मदनपुर पहाड़ी पर स्थित है सीता थापा
स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार सीता थापा का यह स्थान औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड की मदनपुर पहाड़ी पर स्थित है। मान्यता है कि पुनपुन घाट पर पिंडदान करने के बाद भगवान राम ने यहां रात्रि विश्राम किया और अगले दिन गया जी के लिए प्रस्थान किया था।
इसके बाद गया पहुंचकर भगवान राम द्वारा पितरों के लिए पिंडदान और श्राद्ध किए जाने की धार्मिक कथा बताई जाती है। स्थानीय स्तर पर इस पूरी परंपरा का उल्लेख वायु पुराण, पद्म पुराण और बंगाली रामायण यानी कृतिवासी रामायण से जुड़ी कथाओं में होने की बात कही जाती है।
Punpun Ghat Pind Daan: पितृपक्ष में देश-विदेश से पहुंच रहे श्रद्धालु
इसी पुराणिक और धार्मिक परंपरा के प्रति आस्था रखते हुए पितृपक्ष के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु औरंगाबाद के पुनपुन घाट और गया क्षेत्र पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से पिंडदान तथा गया श्राद्ध की धार्मिक प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।
पुनपुन घाट पर उमड़ रही भीड़ से पितृपक्ष मेले की रौनक भी बढ़ गई है। श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय पुरोहित और आचार्य भी धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न कराने में जुटे हुए हैं।
इस दौरान श्रद्धालु सुनील भार्गव, अवधेश कुमार (मध्य प्रदेश) और वीणा कुमारी (ग्वालियर) ने पितृपक्ष और पिंडदान से जुड़ी अपनी आस्था साझा की। वहीं आचार्य रिमेश कुमार पाठक ने पुनपुन घाट और गया श्राद्ध की धार्मिक परंपरा के बारे में जानकारी दी।
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