Report by: Vandana rawat
Yogi Adityanath: गोरखपुर में गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं और राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का समापन हुआ। बुधवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने अपने गुरु महंत अवेद्यनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में संतों, धर्माचार्यों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी महंतद्वय के योगदान को याद किया। सात दिवसीय श्रद्धांजलि समारोह 24 से 30 सितंबर तक आयोजित किया गया था।
Yogi Adityanath: श्रीराम मंदिर आंदोलन में गोरक्षपीठ के योगदान को किया याद
Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए गोरक्षपीठ के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि से जुड़े आंदोलन में महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मुख्यमंत्री के अनुसार, महंत अवेद्यनाथ ने श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का नेतृत्व करते हुए संत समाज को एकजुट करने का काम किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दोनों संतों ने श्रीराम मंदिर के साथ समाज और राष्ट्र के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने कहा कि महापुरुषों का गुण समय, समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ना होता है।
Yogi Adityanath: ‘स्थिरता ही जीवन में सिद्धि का सबसे बड़ा मंत्र’
Yogi Adityanath: श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में सिद्धि का सबसे बड़ा मंत्र स्थिरता है। उन्होंने कहा कि स्थिरता व्यक्ति को आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देती है।
मुख्यमंत्री ने महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों संतों के जीवन चरित्र से समाज को निरंतरता और समर्पण की प्रेरणा मिलती है।
Yogi Adityanath: ‘शिवभक्त हैं तो सम-विषम परिस्थितियों में समान रहें’
Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री ने भगवान शिव और शिवभक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस आदर्श का गुणगान किया जाता है, उसके अनुरूप बनने का प्रयास भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवभक्त को सम और विषम परिस्थितियों में समान और निश्छल बने रहने का प्रयास करना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान शिव ने विषम परिस्थितियों में विष को कंठ में धारण किया, जिसके कारण उन्हें नीलकंठ कहा गया। उन्होंने इसी उदाहरण के माध्यम से कहा कि समाज की विसंगतियों को अपने भीतर समाहित कर लोक कल्याण का आदर्श स्थापित करना शिवत्व की भावना है।
Yogi Adityanath: महंत दिग्विजयनाथ के आदर्शों को आगे बढ़ाया महंत अवेद्यनाथ ने
Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत अवेद्यनाथ का जीवन उनके गुरु महंत दिग्विजयनाथ के आदर्शों और मूल्यों का विस्तार था। उन्होंने सामाजिक विसंगतियों को दूर करने और हिंदू समाज को एकजुट करने के प्रयासों का उल्लेख किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ समाज की शक्ति को संगठित करने के पक्षधर थे, जबकि महंत अवेद्यनाथ ने इसे आगे बढ़ाते हुए सामाजिक एकजुटता के लिए लगातार काम किया। उनके द्वारा चलाए गए सहभोज अभियान का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ लाना था।
Yogi Adityanath: शिक्षा और कौशल विकास से स्वावलंबन पर जोर
Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री ने महंत अवेद्यनाथ के शिक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विस्तार के पक्षधर थे और महंत अवेद्यनाथ ने शिक्षा के साथ कौशल विकास तथा स्वावलंबन को जोड़ने का प्रयास किया।
उन्होंने बताया कि शिक्षा और कौशल विकास के लिए विभिन्न संस्थाओं की स्थापना की गई। विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, खेल गतिविधियों को प्रोत्साहन और छात्रावास जैसी सुविधाओं का भी उल्लेख मुख्यमंत्री ने किया।
Yogi Adityanath: श्रद्धांजलि सभा में संतों और जनप्रतिनिधियों ने भी रखे विचार
Yogi Adityanath: श्रद्धांजलि सभा में मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर के महंत एवं राजस्थान के विधायक महंत बालकनाथ ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ ने गोरक्षपीठ का नेतृत्व करते हुए सनातन संस्कृति से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया।
जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमलाचार्य ने महंत अवेद्यनाथ को दूरदर्शी संत बताते हुए राम मंदिर आंदोलन में उनकी भूमिका का उल्लेख किया। नैमिषारण्य से आए स्वामी विद्या चैतन्य ने गोरक्षा, सनातन धर्म और राष्ट्रीय संस्कृति के संरक्षण में गोरक्षपीठ की भूमिका पर बात रखी।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव सहित अन्य वक्ताओं ने भी महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के जीवन, सामाजिक कार्यों और योगदान को याद किया।
श्रद्धांजलि सभा में कुशीनगर सांसद विजय दूबे, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कृष्णपाल सिंह, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा शर्मा कौशिक, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह और ध्रुव त्रिपाठी सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
Yogi Adityanath: ‘रामकथा के प्रथम बलिदानी जटायु’ पुस्तक का विमोचन
Yogi Adityanath: कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मंचासीन अतिथियों ने महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य एवं महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संयुक्त सचिव रामजन्म सिंह की पुस्तक ‘रामकथा के प्रथम बलिदानी जटायु’ का विमोचन किया।
कार्यक्रम में छात्राओं ने सरस्वती वंदना और श्रद्धांजलि गीत प्रस्तुत किया। वैदिक मंगलाचरण, गोरक्षाष्टक पाठ और महंत अवेद्यनाथ स्त्रोत पाठ भी प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह ने किया।
श्रद्धांजलि समारोह में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संगठनों की ओर से भी महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


