BY: MOHIT JAIN
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) को बड़ा झटका देते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी है। कंपनी ने केंद्र सरकार के आईटी एक्ट और कंटेंट ब्लॉकिंग से जुड़े दिशा-निर्देशों को चुनौती दी थी। कोर्ट ने साफ कहा कि भारत में कार्यरत किसी भी विदेशी कंपनी को यहां के कानूनों का पालन करना होगा।
मामला क्या था?
- एक्स (पूर्व में ट्विटर) ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार आईटी एक्ट के जरिए कंटेंट ब्लॉक करने की कोशिश कर रही है।
- कंपनी ने आईटी एक्ट की धारा 79(3)(बी) को चुनौती देते हुए कहा था कि यह केंद्र को कंटेंट हटाने या ब्लॉक करने का अधिकार नहीं देता।
- इसके अलावा, एक्स ने सरकार के सहयोग पोर्टल (Collaboration Portal) पर ऑनबोर्डिंग को भी चुनौती दी थी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस नाग प्रसन्ना की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि:
- भारत में काम करने वाली हर कंपनी को भारतीय कानून मानने होंगे।
- सोशल मीडिया को “अराजक स्वतंत्रता” की स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता।
- प्रत्येक संप्रभु राष्ट्र की तरह भारत को भी सोशल मीडिया कंटेंट को नियंत्रित करने का अधिकार है।
- अमेरिकी कानून या न्यायशास्त्र को भारत की न्याय व्यवस्था पर थोपना संभव नहीं है।
सॉलिसिटर जनरल की दलील
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वर्चुअल रूप से पेश होकर कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूरी तरह असीमित नहीं हो सकती।
संविधान का अनुच्छेद 19(2) इसके लिए स्पष्ट रूप से प्रतिबंधों की व्यवस्था करता है।
हाईकोर्ट का अंतिम फैसला
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि एक्स अमेरिका में वहां की नियामक व्यवस्था का पालन करता है, लेकिन भारत में बार-बार आदेशों की अनदेखी कर रहा है।
इस आधार पर अदालत ने याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि–
“भारत के नियमों को मानना अनिवार्य है, किसी भी प्लेटफॉर्म को भारतीय बाजार को केवल खेल का मैदान समझने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”
इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि भारत में काम करने वाली हर टेक कंपनी को यहां के कानूनों का पालन करना ही होगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए यह संदेश है कि भारतीय न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर रहकर ही काम करना होगा।





