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ट्रेन में रील देखने और गाना सुनने वालों के लिए बड़ा अलर्ट, नियम नहीं मानेंगे तो भुगतना पड़ेगा भारी जुर्माना

BY: Yoganand Shrivastva

भारतीय रेलवे ने यात्रियों की शांति और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए रात 10 बजे के बाद कुछ सख्त नियम लागू किए हैं। इन नियमों के अनुसार, ट्रेन में तेज आवाज में गाना सुनना, वीडियो देखना या जोर-जोर से बात करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों पर ₹500 से ₹1000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, और गंभीर मामलों में उन्हें अगले स्टेशन पर उतारने की भी कार्रवाई की जा सकती है।

रात 10 बजे के बाद लागू नियम

भारतीय रेलवे ने यात्रियों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ‘आफ्टर 10 पीएम रूल’ लागू किया है। इसके तहत:

  • बिना हेडफोन के तेज आवाज में गाने सुनना या वीडियो देखना मना है।
  • फोन पर स्पीकर के माध्यम से जोर-जोर से बात करना प्रतिबंधित है।
  • नाइट लाइट को छोड़कर सभी अन्य लाइट्स बंद करनी होंगी।

रेलवे का उद्देश्य रात के समय में सभी यात्रियों को आराम और नींद का पूरा अवसर देना है।

उल्लंघन पर सजा

रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 145 के अनुसार ट्रेन में शांति भंग करना दंडनीय अपराध है। नियम तोड़ने पर यात्रियों को पहले चेतावनी दी जाती है। इसके बाद ₹500 से ₹1000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में रेलवे पुलिस (RPF) और ट्रेन टिकट चेकर (TTE) यात्रियों को अगले स्टेशन पर उतार सकते हैं।

नियम सभी कोचों में लागू

ये नियम स्लीपर, एसी और जनरल कोच सभी में समान रूप से लागू हैं। हालांकि एसी और स्लीपर कोच में स्टाफ की मौजूदगी अधिक होने के कारण नियम पालन आसान होता है। जनरल कोच में निगरानी कम होने के बावजूद नियम सभी यात्रियों पर समान रूप से लागू होते हैं।

बच्चों और परिवार के लिए दिशा-निर्देश

रेलवे नियमों में छोटे बच्चों के शोर पर कोई अलग प्रावधान नहीं है। रोते हुए बच्चों को नियम का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। लेकिन माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे बच्चों को जोर-जोर से गाने या खेल में शोर मचाने से रोकें, ताकि अन्य यात्रियों की सुविधा बनी रहे।

यात्रियों के लिए सुझाव

ट्रेन में अकेले नहीं बल्कि सैकड़ों लोग सफर कर रहे होते हैं। इसलिए हर यात्री को दूसरों की सुविधा का ध्यान रखना चाहिए। रात 10 बजे के बाद हेडफोन का इस्तेमाल करें और फोन पर धीमी आवाज में बात करें। थोड़ी-सी जिम्मेदारी और सहयोग से यात्रा सभी के लिए आरामदायक और सुखद बन सकती है।

रेलवे का कहना है कि ये नियम सजा देने के लिए नहीं हैं, बल्कि सभी यात्रियों के सफर को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए बनाए गए हैं।

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