केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के खिलाफ 2,000 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक फ्रॉड के मामले में कार्रवाई की है। इस मामले में CBI ने कंपनी के दफ्तरों और अनिल अंबानी से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की।
यह बैंक फ्रॉड स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से जुड़ा है, जिसमें अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालिया कार्रवाई भी मुंबई NCLT में पेंडिंग है।
इससे पहले 23 जुलाई को भी ED ने रिलायंस ग्रुप से जुड़े 35 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस समय मामला यस बैंक से 3,000 करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड से संबंधित था।
1. CBI ने कार्रवाई क्यों की?
- मामला 2017–2019 के बीच दिए गए लोन से जुड़ा है।
- यस बैंक ने रिलायंस ग्रुप की कंपनियों को लगभग 2,000 करोड़ रुपए के लोन दिए थे।
- प्रारंभिक जांच में पता चला कि इन लोन को कथित फर्जी कंपनियों और ग्रुप की अन्य इकाइयों में डायवर्ट किया गया।
2. CBI की भूमिका
- CBI ने पहले दो FIR दर्ज की हैं।
- ये केस रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड को दिए गए लोन से जुड़े हैं।
- FIR में यस बैंक के पूर्व CEO राणा कपूर का भी नाम शामिल है।
- अन्य संस्थाएं जैसे नेशनल हाउसिंग बैंक, SEBI, NFRDA और बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी ED को जानकारी साझा की।
3. जांच में सामने आई प्रमुख बातें
ED की रिपोर्ट में इसे “सोचा-समझा और सुनियोजित प्लान” बताया गया है। इसमें कई गड़बड़ियां सामने आईं:
- कमजोर या बिना वेरिफिकेशन वाली कंपनियों को लोन देना
- कई कंपनियों में एक ही डायरेक्टर और एड्रेस का इस्तेमाल
- लोन से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों का अभाव
- फर्जी कंपनियों में पैसे ट्रांसफर करना
- पुराने लोन चुकाने के लिए नए लोन देना (लोन एवरग्रीनिंग)
4. अनिल अंबानी पर अन्य आरोप
- SBI ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल अंबानी को फ्रॉड घोषित किया।
- RCom ने बैंक से लिए गए 31,580 करोड़ रुपए का गलत इस्तेमाल किया।
- इसमें से:
- 13,667 करोड़ रुपए अन्य कंपनियों के लोन चुकाने में
- 12,692 करोड़ रुपए रिलायंस ग्रुप की अन्य कंपनियों को ट्रांसफर
- SBI ने CBI में शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है।
- अनिल अंबानी के खिलाफ पर्सनल इन्सॉल्वेंसी (दिवालियापन) कार्रवाई भी NCLT मुंबई में जारी है।
अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों के खिलाफ यह मामला भारतीय बैंकिंग और कॉर्पोरेट जगत में एक बड़ी जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। CBI और ED की कार्रवाई से अब जांच आगे बढ़ेगी और भविष्य में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर बड़े फैसले सामने आ सकते हैं।





