भारत में ऑनलाइन गेमिंग और टैक्सेशन से जुड़े कानूनों में बड़ा बदलाव हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025 और आयकर अधिनियम, 2025 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही दोनों ही विधेयक अब आधिकारिक रूप से कानून बन गए हैं।
पिछले सप्ताह संसद ने इन विधेयकों को पारित किया था—लोकसभा ने 20 अगस्त और राज्यसभा ने 21 अगस्त को इन्हें मंजूरी दी थी।
ऑनलाइन गेमिंग विधेयक 2025: क्या है खास?
नए कानून का उद्देश्य ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग को बढ़ावा देना है, वहीं मनी-बेस्ड हानिकारक गेमिंग पर सख्ती भी की जाएगी।
- यह कानून टीमवर्क, रणनीति और सीखने जैसे गेमिंग के सकारात्मक पहलुओं को प्रोत्साहित करेगा।
- ऑनलाइन मनी गेमिंग से होने वाले सामाजिक और आर्थिक नुकसान को रोकने पर जोर देगा।
- केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे “संतुलित दृष्टिकोण” बताया।
अश्विनी वैष्णव का बयान
मंत्री ने संसद में कहा,
“जिस तरह चिटफंड स्कीम्स ने एक समय परिवारों को बर्बाद किया था, उसी तरह मनी गेमिंग भी समाज के लिए खतरा बन रहा है। इस बिल के जरिए इस समस्या पर रोक लगाई जाएगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं और मध्यम वर्ग के कल्याण को हमेशा नीति निर्माण में प्राथमिकता दी है।
नया आयकर अधिनियम 2025: क्या बदलेगा?
पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह अब आयकर अधिनियम, 2025 लागू होगा। यह बदलाव अगले वित्तीय वर्ष से प्रभावी होगा।
नए टैक्स कानून की प्रमुख विशेषताएं:
- कर कानूनों को सरल और पारदर्शी बनाया जाएगा।
- अधिनियम में शब्दों की संख्या कम होगी, जिससे समझना आसान होगा।
- करदाताओं के लिए अनुपालन-अनुकूल (compliance-friendly) व्यवस्था बनेगी।
आयकर विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा:
“आयकर अधिनियम, 2025, एक ऐतिहासिक सुधार है जो देश में एक सरल, पारदर्शी और अनुपालन-अनुकूल प्रत्यक्ष कर प्रणाली की शुरुआत करेगा।”
देश की अर्थव्यवस्था और डिजिटल सेक्टर पर असर
इन दोनों नए कानूनों के लागू होने से:
- ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को नियंत्रित और सुरक्षित ढांचा मिलेगा।
- युवाओं और खिलाड़ियों को ई-स्पोर्ट्स और स्किल-बेस्ड गेमिंग में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।
- टैक्स व्यवस्था सरल होने से आम करदाताओं पर अनुपालन का बोझ कम होगा।
- भारत की डिजिटल इकॉनमी को नई मजबूती मिलेगी।





