BY: Yoganand Shrivastva
गढ़वा ज़िले के भवनाथपुर पंचायत के बुका गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला तेतरी देवी की डायरिया से मौत हो गई, लेकिन उनके तीनों बेटे, बहुएं और पोते-पोतियां शव को घर में छोड़कर गांव से फरार हो गए। 40 घंटे तक शव घर में पड़ा रहा और कोई अंतिम संस्कार करने नहीं आया।
पति की पहले ही हो चुकी थी मौत
गुरुवार को तेतरी देवी का निधन हुआ। उनके पति हरचरन बियार की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी। परिजनों के फरार होने के बाद ग्रामीणों ने उम्मीद की थी कि परिवार का कोई सदस्य लौटकर अंतिम संस्कार करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
डायरिया के डर से छोड़ा गांव
मृतका के बेटे बिंदू बियार का कहना है कि डायरिया फैलने के डर से पूरा परिवार गांव छोड़कर चला गया, जिसके कारण अंतिम संस्कार नहीं हो सका।
ग्रामीणों ने संभाला जिम्मा
शनिवार को कुछ ग्रामीण शव को दफनाने की तैयारी कर रहे थे, तभी जिला परिषद सदस्य रंजनी शर्मा और पंचायत मुखिया बेबी देवी को इसकी जानकारी मिली। उन्होंने दफनाने की जगह हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करने के निर्देश दिए।
कफन और मुखाग्नि की व्यवस्था
समाजसेवी अनुज यादव उर्फ बबलू यादव के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कफन की व्यवस्था की और शव को बुका नदी के श्मशान घाट ले जाकर अंतिम संस्कार किया। रामलाल भुइयां ने मुखाग्नि दी। ग्रामीणों ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि हिंदू धर्म में माता-पिता के अंतिम संस्कार का कर्तव्य पुत्र का होता है, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिल सके।
प्रशासन की चुप्पी पर नाराज़गी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस संवेदनशील मामले में स्थानीय प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया, जिससे लोगों में रोष है।





