BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली: नेशनल हेराल्ड से संबंधित बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग केस में आज का दिन अहम माना जा रहा था, जब दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने को लेकर फैसला सुनाना था। हालांकि, कोर्ट ने यह फैसला आज नहीं सुनाया और अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त 2025 को तय की गई है।
इस केस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत कुल 7 प्रमुख व्यक्तियों के खिलाफ जांच की जा रही है। यदि कोर्ट चार्जशीट पर संज्ञान लेता है, तो इन सभी को समन भेजा जा सकता है, जिससे उनकी कानूनी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
क्या है मामला?
यह पूरा विवाद साल 2012 से शुरू हुआ, जब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (YIL) के माध्यम से एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्ति को अवैध रूप से हड़प लिया।
AJL एक पुरानी प्रकाशन संस्था थी, जो कभी नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज़ जैसे अखबार प्रकाशित करती थी। इन अखबारों की शुरुआत पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1938 में की थी, जिनका उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम की विचारधारा को आगे बढ़ाना था। समय के साथ AJL को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा और 2008 में अखबारों का प्रकाशन बंद कर दिया गया।
ईडी के आरोप क्या हैं?
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि यंग इंडियन नामक कंपनी को AJL की 90% हिस्सेदारी दी गई, और इसके जरिए करोड़ों की संपत्तियों पर कब्जा किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार:
- यंग इंडियन का इस्तेमाल केवल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया।
- इसका कोई सामाजिक या परोपकारी उद्देश्य नहीं था।
- इस कंपनी को चंदा देने वाले लोगों को राजनीतिक लाभ देने का आरोप भी लगाया गया है।
- ईडी का कहना है कि कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर ये दान लिए गए थे और दानदाताओं को न तो कंपनी की भूमिका का पता था और न ही उद्देश्य का।
कोर्ट की पिछली कार्यवाही
पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था कि ईडी की ओर से दाखिल की गई चार्जशीट को स्वीकार किया जाए या नहीं। अब 7 अगस्त को ये तय किया जाएगा कि क्या आरोपियों को समन जारी होंगे।
कानूनी और राजनीतिक महत्व
यह केस सिर्फ एक वित्तीय विवाद नहीं बल्कि एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। कांग्रेस पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, जबकि विपक्ष इसे भ्रष्टाचार का खुलासा कहता है। राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर कानूनी शिकंजा कसने की संभावनाओं को देखते हुए यह केस आने वाले समय में राजनीति को और गरमा सकता है।





