दक्षिणी सीरिया के सूवेदा प्रांत में कई दिनों तक जारी हिंसा के बाद अब राहत की खबर है। सीरिया और इजरायल के बीच शनिवार तड़के एक अहम सीजफायर समझौता हुआ है, जिससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता की नई उम्मीद जगी है।
इस समझौते की घोषणा अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक ने की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब सभी समुदाय — द्रूज, बेदुईन और सुन्नी — हथियार डालकर एकजुट और शांत सीरिया के निर्माण में जुटें।
BREAKTHROUGH —— Israeli Prime Minister @Netanyahu and Syrian President Ahmed al-Sharaa @SyPresidency supported by the U.S.A. @SecRubio have agreed to a ceasefire embraced by Türkiye, Jordan and its neighbors. We call upon Druze, Bedouins, and Sunnis to put down their weapons and…
— Ambassador Tom Barrack (@USAMBTurkiye) July 18, 2025
क्यों भड़की हिंसा?
- सूवेदा में द्रूज अल्पसंख्यकों और सुन्नी बेदुईन कबीलों के बीच पिछले कई दिनों से झड़पें हो रही थीं।
- सीरिया की सेना ने इस संघर्ष में बेदुईन समूहों का पक्ष लिया, जिससे हालात और बिगड़ गए।
- इजरायल ने हस्तक्षेप करते हुए द्रूज समुदाय की रक्षा के लिए सीरियाई सेना पर एयरस्ट्राइक की।
इजरायल और द्रूज समुदाय का संबंध
- द्रूज समुदाय इजरायल का वफादार अल्पसंख्यक है।
- यह समुदाय इजरायली सेना में भी बड़े पैमाने पर शामिल है।
- इसलिए इजरायल ने सीरिया की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ द्रूजों की सुरक्षा में कदम उठाया।
हिंसा का असर
- रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है।
- करीब 80,000 लोग बेघर हो गए हैं (संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक)।
- पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं।
- द्रूज समुदाय के घरों में लूटपाट और आगजनी के आरोप भी सरकारी बलों पर लगे हैं।
किसने समर्थन दिया समझौते को?
इस सीजफायर को तुर्की, जॉर्डन और अरब देशों ने समर्थन दिया है। इससे क्षेत्र में:
- मानवता की रक्षा
- आंतरिक स्थिरता
- और शरणार्थियों के लिए राहत की संभावना बढ़ी है।
फिर से भड़की हिंसा?
बुधवार को अमेरिका और अन्य मध्यस्थ देशों की मदद से द्रूज नेताओं को आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी, और सरकारी बलों को हटाया गया था। लेकिन गुरुवार देर रात फिर झड़पें शुरू हो गईं।
शांति की उम्मीद, लेकिन स्थिति नाजुक
सीरिया और इजरायल के बीच हुआ यह समझौता भले ही संघर्ष के अंत की ओर एक कदम हो, लेकिन स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों का सहयोग और ईमानदारी जरूरी है। सूवेदा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सांप्रदायिक सद्भाव और स्थिर प्रशासन ही आगे का रास्ता है।





