रिपोर्ट: संजीव कुमार शर्मा
Bhagalpur भागलपुर नगर निगम की सामान्य बोर्ड बैठक शनिवार को विकास के मुद्दों से अधिक पार्षदों के गुस्से और हंगामे के लिए चर्चा में रही। बैठक की शुरुआत ही मेयर डॉ. वसुंधरा लाल और डिप्टी मेयर की देरी से पहुंचने पर पार्षदों की नाराजगी के साथ हुई। सदन के भीतर घंटों चले शोर-शराबे और आरोप-प्रत्यारोप ने निगम प्रशासन की चुनौतियों को उजागर कर दिया।
Bhagalpur उपेक्षा से नाराज पार्षद ने दी इस्तीफे की चेतावनी
बैठक के दौरान सबसे अधिक चर्चा वार्ड संख्या 20 के पार्षद शांडिल्य नन्दिकेश की रही। उन्होंने ढेवर गेट क्षेत्र में विकास कार्यों की निरंतर अनदेखी का मुद्दा उठाया। पार्षद ने भावुक और आक्रामक होते हुए सदन में कहा कि यदि इस क्षेत्र की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। इस मुद्दे पर अन्य पार्षदों ने भी समर्थन देते हुए क्षेत्रीय भेदभाव के आरोप लगाए।
Bhagalpur पार्षद विवाद और प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल
वार्ड 13 के पार्षद रंजीत यादव से जुड़े एक पुराने विवाद ने बैठक में आग में घी डालने का काम किया। इस मुद्दे पर पार्षदों के बीच जमकर गुटबाजी और तीखी बहस देखी गई। इसके अलावा, कई सदस्यों ने नगर निगम के कार्यालय अधीक्षक की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाई और प्रशासनिक सुधार की मांग की। पार्षदों का आरोप था कि फाइलों का निस्तारण समय पर नहीं होता, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
Bhagalpur स्मार्ट सिटी और दक्षिणी भाग का मुद्दा
हंगामे के बीच शहर की बुनियादी सुविधाओं पर भी चर्चा हुई:
- स्मार्ट सिटी: पार्षदों ने स्मार्ट सिटी परियोजना की धीमी रफ्तार और प्याऊ योजनाओं की विफलता पर सवाल खड़े किए।
- दक्षिणी क्षेत्र की उपेक्षा: शहर के दक्षिणी भाग के विकास के लिए विशेष पैकेज और ध्यान देने की मांग की गई।
Bhagalpur नगर आयुक्त ने संभाला मोर्चा
जब स्थिति पूरी तरह अनियंत्रित होने लगी, तब नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने पार्षदों को शांत कराते हुए आश्वासन दिया कि शहर की साफ-सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने सभी पार्षदों से अपील की कि वे शहर के विकास के लिए मिलकर सहयोग करें, जिसके बाद माहौल कुछ हद तक शांत हुआ।
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