BY: Yoganand Shrivastva
इंदौर, इंदौर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने 20 हजार से अधिक वाहनों से 400 करोड़ रुपए की रोड टैक्स और पेनल्टी वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन बकायादारों की पहचान करते हुए आरटीओ ने टैक्स की वसूली को लेकर एक विस्तृत कार्ययोजना बनाई है, जिसमें वाहन जब्ती और नीलामी जैसे सख्त कदम शामिल हैं।
वसूली का नया अभियान
इस वित्तीय वर्ष में इंदौर आरटीओ को 1150 करोड़ रुपए की वसूली का लक्ष्य मिला है। बीते दो वर्षों से विभाग लक्ष्य से पीछे रहा है, जिसके चलते अब पुराने बकायादारों की ओर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी प्रदीप शर्मा के अनुसार, करीब 20 हजार वाहन ऐसे हैं जिनसे अब तक टैक्स और जुर्माना नहीं लिया गया है।
कई वाहन बंद, गायब या स्क्रैप हो चुके
इन वाहनों में कई ऐसे हैं जो अब सड़कों पर नहीं चलते — कुछ को स्क्रैप किया जा चुका है, तो कुछ को NOC लेकर दूसरे राज्यों में स्थानांतरित कर दिया गया है। कई मामलों में वाहन मालिकों का पता भी अधूरा है। पुराने रजिस्टर आधारित रिकॉर्ड को डिजिटल करने में भी डेटा की अपूर्णता आ रही है।
पहले चरण में हाल के बकायादारों पर कार्रवाई
आरटीओ ने पिछले साल के बकायादारों को प्राथमिकता पर लिया है। अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है कि वे संबंधित वाहन मालिकों से संपर्क करें। फ़ोन कॉल, पते पर जाकर सूचना देना और टैक्स भुगतान की अपील करना इस प्रक्रिया का हिस्सा है।
जो वाहन स्वामी निर्धारित समय में टैक्स नहीं चुकाते हैं, उनके खिलाफ वाहन जब्ती और नीलामी की कार्यवाही की जाएगी।
पुराना डेटा बना सबसे बड़ी चुनौती
विभाग के अनुसार, सूची में कई ऐसे वाहन भी शामिल हैं जो 40 से 50 साल पुराने हैं। 2002 में शुरू हुई स्मार्ट चिप प्रणाली के पहले के वाहन आज भी रिकॉर्ड में हैं, लेकिन उनका डेटा अपूर्ण है। अब पूरा डाटा ‘वाहन पोर्टल’ पर स्थानांतरित हो गया है, लेकिन कई वाहन ऐसे हैं जिनका रिकॉर्ड या मालिक की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
वसूली के प्रयासों में सीमाएं भी
सूत्रों के अनुसार, कुछ वाहनों से वसूली लगभग असंभव है क्योंकि वे वर्षों पहले बंद हो चुके हैं या स्क्रैप में जा चुके हैं। फिर भी उनका रिकॉर्ड सिस्टम में बना हुआ है, जिससे कुल बकाया राशि का आंकड़ा वास्तविकता से ज्यादा दिख रहा है।
इसलिए आरटीओ फिलहाल व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए नए और हाल के बकायों पर फोकस कर रहा है। जैसे-जैसे स्टाफ और संसाधन उपलब्ध होंगे, बाकी पुराने मामलों की ओर भी कार्यवाही बढ़ाई जाएगी।





