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ग्वालियर: नर्सिंग कॉलेजों का मायाजाल, सीबीआई जांच के बाद भी नहीं थमा खेल, मान्यता के लिए फिर शुरू हुई जोड़-तोड़

रिपोर्टर: अरविंद चौहान, अपडेट: योगानंद श्रीवास्तव


मध्य प्रदेश के ग्वालियर में नर्सिंग माफिया इतने बेखौफ हैं कि CBI जांच और मान्यता रद्द होने के बाद भी उन्होंने फिर से खेल शुरू कर दिया है। CBI ने चंबल अंचल के लगभग सभी नर्सिंग स्कूलों को अमान्य घोषित कर दिया था। लेकिन अब इन संस्थानों ने फिर से मान्यता प्राप्त करने के लिए आवेदन कर दिया है। सवाल ये है कि क्या ये कॉलेज वाकई शैक्षणिक मानकों को पूरा करते हैं या फिर सब कुछ सिर्फ कागजों पर सही है?


कलेक्टर ने बनाई निरीक्षण टीम, 32 संस्थानों की जांच की जिम्मेदारी

ग्वालियर कलेक्टर ने इस पूरे मामले की सत्यता परखने के लिए तीन सदस्यों की छह टीमें गठित की थीं। इन टीमों को जिले के 32 नर्सिंग कॉलेजों का भौतिक निरीक्षण करना था। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह था कि नर्सिंग कॉलेज जिस पते पर दर्ज हैं, वहां वास्तव में कोई कॉलेज है भी या नहीं, और वह जगह मान्यता के मापदंडों पर खरी उतरती है या नहीं।


डॉक्टरों को भी बनाया गया जांच का हिस्सा

टीम में शामिल डॉक्टरों को नर्सिंग एजुकेशन के मानकों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। रिपोर्ट में यह बताना था कि संस्थान शैक्षणिक, बुनियादी ढांचे और स्टाफ की योग्यता के नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। लेकिन यह प्रक्रिया जल्द ही सवालों के घेरे में आ गई।


आरोप: CMHO ने पैसे लेकर दे दी ‘क्लीन चिट’

सूत्रों के मुताबिक ग्वालियर के CMHO (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) ने प्रत्येक कॉलेज से 8 से 10 लाख रुपये की रिश्वत लेकर सभी को क्लीन चिट देने की तैयारी कर ली है। मूल नियमों के अनुसार, जिस इमारत में नर्सिंग कॉलेज चल रहा हो, उसी परिसर में D.Pharma, B.Pharma, B.Ed, D.Ed, पैरामेडिकल और जनरल कोर्स नहीं चल सकते। नर्सिंग संस्थानों के लिए स्वतंत्र भवन होना अनिवार्य है।

फिर भी, निरीक्षण टीमों ने इस बिंदु की अनदेखी की। आरोप है कि ये टीम भी मौन सहमति या दबाव में काम कर रही है।


टेलीफोन रिकॉर्डिंग बनी सबूत

स्वदेश न्यूज़ के पास दो नर्सिंग कॉलेज संचालकों की टेलीफोनिक बातचीत की रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिसमें वे CMHO से हुए लेन-देन की बात कर रहे हैं। यह रिकॉर्डिंग अब पूरे मामले को और भी संगीन बना रही है।


इस पूरे घटनाक्रम ने ग्वालियर के नर्सिंग कॉलेजों में व्याप्त भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन इस पर कोई सख्त कदम उठाएंगे या फिर ये माफिया ऐसे ही सिस्टम को चाटते रहेंगे?

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि कैसे शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी संस्थाओं में भ्रष्टाचार, आने वाली पीढ़ियों की गुणवत्ता और भरोसे पर सीधा प्रहार कर रहा है।

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