अंबा प्रसाद: घोड़े से विधानसभा तक का सफर और ईडी की छापेमारी के बीच छाया एक नाम

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Amba Prasad: A name that shines amidst the journey from horse to assembly and ED raids

रिपोर्टर: रूपेश कुमार दास
झारखंड की राजनीति में अंबा प्रसाद एक ऐसा नाम बन चुकी हैं, जो घुड़सवारी, संघर्ष, सियासी विरासत और ईडी की कार्रवाइयों को लेकर बार-बार चर्चा में रहती हैं। कभी UPSC की उम्मीदवार रहीं अंबा आज एक पूर्व विधायक और विवादों के घेरे में आई एक मुखर नेता के रूप में जानी जाती हैं।

घुड़सवारी: जब घोड़े पर चढ़कर पहुंचीं विधानसभा

2019 में झारखंड विधानसभा सत्र के दौरान अंबा प्रसाद जब घोड़े पर सवार होकर विधानसभा भवन पहुंचीं, तो यह दृश्य सोशल मीडिया और खबरों की सुर्खी बन गया।
यह नज़ारा उनके आत्मविश्वास और परंपरा से हटकर चलने वाले व्यक्तित्व की प्रतीक बन गया।
युवाओं, खासकर महिलाओं के बीच यह तस्वीर प्रेरणा का स्रोत बनी।

UPSC से सियासत तक: एक मोड़ जिसने बदल दी दिशा

अंबा प्रसाद का सपना IAS बनने का था। उन्होंने दिल्ली में रहकर UPSC की तैयारी की और 2016 में प्रीलिम्स परीक्षा भी पास कर ली थी।
लेकिन उसी दौरान पिता योगेंद्र साव और मां निर्मला देवी की गिरफ्तारी ने उनका जीवन बदल दिया।
पारिवारिक संकट ने उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़ राजनीति में उतरने के लिए प्रेरित किया।

2019 में मिली जीत, लेकिन विवादों ने नहीं छोड़ा साथ

अंबा प्रसाद ने 2019 में बड़कागांव से विधानसभा चुनाव जीतकर युवा और ऊर्जावान नेता के रूप में पहचान बनाई।
वह शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर सक्रिय रहीं।
लेकिन राजनीति में कदम रखने के बाद से ही वह विवादों और ईडी की रडार पर बनी रहीं।

ताजा छापा: ईडी की 8 ठिकानों पर कार्रवाई

4 जुलाई 2025 को ईडी ने रांची, हजारीबाग और बड़कागांव में 8 स्थानों पर छापेमारी की।
यह कार्रवाई कथित रूप से कोल ट्रांसपोर्टिंग और पावर सेक्टर से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित बताई जा रही है।
ईडी ने अंबा के भाई के चार्टर्ड अकाउंटेंट बादल गोयल, समाधान भवन और सहयोगियों के परिसरों की तलाशी ली।
इससे पहले मार्च 2024 में भी ईडी ने 17 ठिकानों पर रेड कर 35 लाख नकद समेत कई दस्तावेज जब्त किए थे।

विरासत और असहमति: क्यों चुनौती बनती रहीं अंबा?

अंबा ने अपने माता-पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया, लेकिन खुद भी जनता के बीच मजबूत आधार बनाया।
उन्होंने सत्ता पक्ष द्वारा हजारीबाग लोकसभा टिकट की पेशकश ठुकराकर यह स्पष्ट कर दिया कि वह अपने निर्णयों में स्वतंत्र और मुखर हैं।
वह ईडी की छापेमारी को राजनीतिक प्रतिशोध करार देती रही हैं।

निष्कर्ष: अंबा प्रसाद – सिर्फ नेता नहीं, एक चलती-फिरती कहानी

अंबा प्रसाद की कहानी झारखंड की राजनीति में एक युवा महिला नेता की संघर्षगाथा है – जिसमें UPSC की तैयारी है, पारिवारिक संकट है, घुड़सवारी का जुनून है, और अब ईडी की छापेमारी से उपजी चुनौती भी है।
अब जब वह एक बार फिर जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह इस संकट से निकलकर फिर से खुद को साबित कर पाएंगी, या यह विवाद उनकी राजनीतिक राह में नई अड़चन बन जाएगा।

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