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Swadesh News > राज्य > मध्य प्रदेश > Nari Shakti Vandan Adhiniyam : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के संबंध में प्रदेशवासियों के नाम संदेश
मध्य प्रदेश

Nari Shakti Vandan Adhiniyam : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के संबंध में प्रदेशवासियों के नाम संदेश

Abhishek Singh
Last updated: April 21, 2026 8:17 pm
By Abhishek Singh
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10 Min Read
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Abhishek Singh

Nari Shakti Vandan Adhiniyam : आज मैं देश के ऐसे ज्वलंत मुद्दे पर कुछ कहना चाहता हूं, जिसका संबंध राष्ट्र की आधी आबादी नारी शक्ति से जुड़ा है। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने महिला सशक्तिकरण का जो सपना देख है, उसे विपक्ष की कुछ राजनीतिक पार्टियों ने अपने निजी स्वार्थ के कारण उसे पूरा नहीं होने दिया। मैं बात कर रहा हूं – नारी शक्ति वंदन अधिनियम की, जो महिलाओं के सशक्तिकरण के ऐतिहासिक निर्णय को साकार करता। मुझे अफसोस के साथ दुख भी है कि हमारे प्रधानमंत्री जी के नारी शक्ति को सम्मान देने के दृष्टिकोण को विपक्षी समझ नहीं सके।

Nari Shakti Vandan Adhiniyam

लोकसभा एवं विधानसभाओं में महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला सिर्फ राजनीतिक फैसला नहीं था। यह आधे राष्ट्रवासियों अर्थात् हमारी बहनों को प्रतिष्ठित करने का उपक्रम था। दशकों से नेतृत्व संभालने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रही नारियों को हमारे प्रधानमंत्री जी ज्यादा इंतजार नहीं कराना चाहते। बहनों की आंखों में सुनहरे भारत के सपने हैं। संसद और अन्य क्षेत्रों में भारत की नारी की सक्रिय भागीदारी के बिना इन सपनों को साकार नहीं किया जा सकता।

Nari Shakti Vandan Adhiniyam : हमारे राष्ट्र में महिलाओं को सदैव सम्मान देने की परम्परा रही है। भारतीय संस्कृति नारियों को वंदनीय मानती है। हमारे अनेक सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी बेटियों के चरण छूकर मांगलिक कार्य प्रारंभ किए जाते हैं। भारत स्त्री शक्ति को प्रारंभ से महत्वपूर्ण मानता रहा है। राष्ट्र को स्वतंत्र करवाने में मातृ शक्ति भी पीछे नहीं रही, इसके अनेक उदाहरण है।

यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जिन चार वर्गों के कल्याण की चर्चा करते हैं, उनमें नारी भी शामिल है। इसी धारणा से प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन के माध्यम से एक ऐसी पहल की, जो भारतीय लोकतंत्र में पहले नहीं हुई। स्वतंत्रता के बाद से ही हमारी संसद और विधानसभाओं में बहनों और बेटियों के लिए स्थान सुरक्षित रखने की बातें की जाती रहीं है। लोकसभा और राज्यसभा में महिलाओं की संख्या बढ़े और उनका सम्मानजनक प्रतिनिधित्व हो, इस दृष्टि से यह अधिनियम लाया गया था।

यह बहुत खेदजनक है कि चंद व्यक्तियों और दलों ने महिला कल्याण के ऐसे ऐतिहासिक प्रयास के पक्ष में सहमति व्यक्त नहीं की, अपितु विरोध करते हुए अपनी नारी विरोधी होने की प्रवृत्ति का परिचय दिया और सम्पूर्ण भारतीय समाज के समक्ष खुद के नकारात्मक होने का प्रत्यक्ष प्रमाण भी दे दिया है।

Nari Shakti Vandan Adhiniyam : नारी शक्ति वंदन अधिनियम इस महीने पारित हो जाता, तो महिलाओं को आगे बढ़ाने का स्वर्णिम अवसर होता। यह कांग्रेस सहित अन्य दलों को भी यश प्राप्त करने का एक स्वर्णिम अवसर होता। विपक्ष के पास यह अवसर आया था, जिसे उन्होंने खो दिया है। उदाहरण के लिए वर्तमान में पश्चिम बंगाल में टीएमसी और तमिलनाडु में डीएमके की सरकार है। इन दलों की महिला जनप्रतिनिधियों को सांसद और विधायक बनने का सौभाग्य मिलता। सम्पूर्ण समाज तभी सशक्त होता है, जब महिला सशक्त हो। कांग्रेस ने अधिनियम का विरोध कर यह प्रमाण दे दिया कि वह राष्ट्र हित और महिला सम्मान के पक्ष में नहीं है, जो कांग्रेस के लिए भी हितकारी नहीं है। सुविचारित रणनीति न अपनाने और राष्ट्र कल्याण को प्राथमिकता न देने की प्रवृत्ति के कारण ही कांग्रेस गर्त में जा रही है।

राष्ट्र में आधी आबादी हमारी बहनों और बेटियों की है, उन्हें ताकतवर बनाने के प्रयास का जिन व्यक्तियों ने विरोध किया वह एक दिन इसका पश्चाताप अवश्य करेंगे। कांग्रेस सहित डीएमके, टीएमसी, समाजवादी पार्टी एवं सहयोगी दल निश्चित ही अपनी इस ऐतिहासिक भूल पर न सिर्फ जनआक्रोश का सामना करेंगे बल्कि खुद अपनी त्रुटि पर आंसु भी बहायेंगे। जबकि हम सभी को महिलाओं के हित में सकारात्मक होकर उन्हें शक्तिशाली बनाने और समर्थ बनाने का कर्तव्य पूरा करना चाहिए।

Nari Shakti Vandan Adhiniyam : महिलाओं ने अनेक क्षेत्रों में परिश्रम और रचनात्मकता से सफलता के नए सोपान प्राप्त किए हैं। हाल ही में महिला स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों की समीक्षा में पाया गया कि अनेक असंभव कार्य भी बहनों ने करके दिखाएं हैं। यहां तक कि अब हमारी बहनें कृषि क्षेत्र में भी नई तकनीक का लाभ लेकर कार्य कर रही है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी बहनों का दखल बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री जी द्वारा नारी सशक्तिकरण के लिए लिया गया निर्णय 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णय में से एक है, जो महिलाओं को सशक्त बनाने का मुख्य आधार बनता। महिलाओं के हित में बनने वाले कानून को इस तरह रोककर महिलाओं के विकास में रोड़ा बनने वाले आपराधिक कृत्य के दोषी हैं। कांग्रेस एक राजनीतिक दल नहीं, महिला विरोधी नेताओं का जमावड़ा बनकर रह गया है। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वो अपने संगठन में भी महिला पदाधिकारियों को कोई सम्मान और अधिकार नहीं देगी। आखिर बहनों की ऐसी उपेक्षा कांग्रेस कब तक करती रहेगी ?

Nari Shakti Vandan Adhiniyam : कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के हित में बनी रणनीति का विरोध किया है। देखा जाए तो कांग्रेस ने महिलाओं का नहीं, राष्ट्र का बहुत बड़ा नुकसान किया है। चाहे तीन तलाक का प्रश्न हो अथवा कश्मीर से धारा 370 हटाने का विरोध करने का मामला, कांग्रेस की भूमिका हमेशा नकारात्मक रही है। यूनिफार्म सिविल कोड और समान नागरिक आचार संहिता का भी कांग्रेस विरोध करती है। ऐसे सार्थक सुधारों के नाम पर सिर्फ बाधाएं खड़ी करना, कांग्रेस का एजेण्डा बन गया है। वन नेशन वन इलेक्शन का भी कांग्रेस विरोध करती है। देश से घुसपैठियों को भगाने को भी कांग्रेस अनुचित मानती है। यही नहीं मतदाता सूची के शुद्धिकरण अर्थात् एसआईआर की उपयोगिता भी कांग्रेस को बिल्कुल समझ में नहीं आती। इसके अलावा वक्फ बोर्ड जैसी संस्थाओं में सुधार का प्रयास किया जाए तो कांग्रेस को सबसे ज्यादा तकलीफ होती है। इस तरह राष्ट्र हित के आवश्यक कार्यों, सार्थक सुधारों और महिलाओं के विरोध का जिम्मा कांग्रेस ने उठा रखा है। यही कांग्रेस का इतिहास है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के खिलाफ खड़ी हुई कांग्रेस को कोई माफ करने वाला नहीं है। महिला जनप्रतिनिधि ही नहीं, देश की एक-एक महिला कांग्रेस से जवाब मांगेगी। परिसीमन से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को क्या क्षति हो रही, यह उन्हें स्पष्ट बताना चाहिए। प्रत्येक राज्य में 50 प्रतिशत सीटों की वृद्धि हो रही थी। जब समानुपातिक रूप से वृद्धि की पहल होती है, तो इसका लाभ सिर्फ मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और दिल्ली जैसे राज्यों को ही नहीं तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल को भी मिलता। सीटों को लेकर प्रत्येक राज्य की स्थिति में समान रूप से परिवर्तित होती। सभी विपक्षी दलों की महिलाओं को अपने दल के नेताओं से प्रश्न करना चाहिए कि महिलाओं के नेतृत्व पर विश्वास क्यों नहीं किया जा रहा ? साथ ही महिला जनप्रतिनिधियों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है।

Nari Shakti Vandan Adhiniyam : बहनों की सुरक्षा और उनका सम्मान भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। गत सोमवार को भोपाल के मोतीलाल नेहरू विज्ञान महाविद्यालय के मैदान पर जन आक्रोश महिला पदयात्रा में हमारे प्रदेश की नारी शक्ति ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। भोपाल ही नहीं देश भर में इस मुद्दे पर जनता में कांग्रेस के प्रति आक्रोश है। विपक्ष को इस जन आक्रोश की जानकारी भी है। आज नहीं तो कल सभी स्तर के निर्वाचनों में हमारी बहनें कांग्रेस एवं सहयोगी दलों को सबक सीखाएंगी। हमने यह भी निर्णय लिया है कि मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र आहूत किया जायेगा। इस सत्र में महिला कल्याण के संबंध में जनप्रतिनिधियों के विस्तृत विचार पटल पर आएंगे। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा होगी और कांग्रेस सहित संपूर्ण विपक्ष के लिए निंदा प्रस्ताव पारित किया जाएगा। यही नहीं प्रदेश में स्थानीय निकायों में भी निंदा प्रस्ताव लाए जाएंगे।

अंत में मैं यह कहना चाहूँगा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम से भारत वर्ष की नारियों को उड़ान देने की जो मुहिम प्रधानमंत्री जी ने शुरू की थी, उसमें विपक्षी दलों का असहयोग माताओं, बहनों और बेटियों के आक्रोश में बदल गया है। देश की नारी शक्ति के स्वाभिमान और सम्मान को जो चोट पहुँची है, उसका परिणाम कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों को भोगना होगा।

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