MP JalGangaSamvardhan : मध्यप्रदेश में 19 मार्च से 30 जून तक चलाया जा रहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जनभागीदारी से एक व्यापक जन आंदोलन बन गया है, जिसके माध्यम से नदियों, तालाबों और बावड़ियों का पुनर्जीवन किया जा रहा है। 5 लाख 25 हजार से ज्यादा नागरिकों और 2 लाख से ज्यादा ‘जलदूतों’ की सक्रिय सहभागिता से 40 हजार से ज्यादा खेत तालाब और करीब 22 हजार जल संरचनाएं पुनर्जीवित की गई हैं। सरकार की पहल और जनता की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को गांव-गांव तक पहुंचा दिया है। राज्य सरकार के इस अभियान का उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, पुनर्जीवन और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना है।
MP JalGangaSamvardhan : मध्यप्रदेश में जल संरक्षण का सामाजिक संकल्प, मुख्यमंत्री का आह्वान, प्रदेश का तीसरा स्थान
खास बात यह है कि इसमें सिर्फ सरकारी अमला ही नहीं, बल्कि आम नागरिक, सामाजिक संगठन, पंचायतें और युवा भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आह्वान किया है कि हम सभी इस अभियान से जुड़ें और नदियों, तालाबों व जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करने में सहभागी बनें। कुछ समय में ही जल संरक्षण के कार्यों से मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह अभियान मिशन मोड में चलाया जा रहा है, जहां प्रशासनिक अमला लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है।

जल संरचनाओं के निर्माण और मरम्मत के साथ-साथ लोगों को जल बचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह अभियान न सिर्फ जल संरक्षण बल्कि सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक बन गया है।‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अब सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनता के सहयोग से एक मजबूत जन आंदोलन बन चुका है, जो प्रदेश के जल भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। यदि यही जनभागीदारी बनी रही, तो मध्यप्रदेश आने वाले समय में जल प्रबंधन के मॉडल राज्य के रूप में उभर सकता है।
MP JalGangaSamvardhan : प्रमुख उपलब्धियां (अप्रैल 2026 तक)
• संरचनाओं का पुनर्जीवन – 59,577 कूप रिचार्ज संरचनाएं और 21,950 से अधिक जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार।
• खेत तालाब – 39,977 नए खेत तालाबों का निर्माण।
• जल मंदिर – प्याऊ के रूप में 2,682 जल मंदिर स्थापित।
• नदी संरक्षण – 57 से अधिक नदियों में मिलने वाले 140 बड़े नालों को चिह्नित कर सफाई।
• वित्तीय व प्रशासनिक पहल – लगभग ₹6,236 करोड़ की लागत से 2.44 लाख से अधिक कार्य किए जा रहे हैं। मनरेगा और अमृत सरोवरों के माध्यम से जल स्रोतों का कायाकल्प हो रहा है।
• राष्ट्रीय रैंकिंग – अभियान के कारण मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
• ‘खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में’ के सिद्धांत पर आधारित यह अभियान।
MP JalGangaSamvardhan : जल संरक्षण को जन-जन तक पहुंचाने का मिशन
• जल संकट से निपटना और जल स्रोतों का संरक्षण
• सरकार ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2026’ की शुरुआत की
• मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चल रहा है ये अभियान
• जल संरक्षण को जनभागीदारी के जरिए बड़ा जन आंदोलन बनाया
• तेजी से किया जा रहे तालाबों, कुओं,नदियों की साफ-सफाई का कार्य
• श्रमदान के जरिए जल संरचनाओं का पुनर्जीवन
• स्कूल-कॉलेजों में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान
• महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भूमिका
• जल स्रोतों का संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन, भूजल स्तर में सुधार
• समाज में जल के प्रति जागरूकता बढ़ाना
• तालाब, कुएं, बावड़ी और नदी घाटों की सफाई और पुनर्जीवन
• चेक डैम और स्टॉप डैम का निर्माण व मरम्मत (10 हजार से अधिक संरचनाओं का लक्ष्य)
• वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज कार्य
• गांव-गांव में श्रमदान और जनजागरूकता अभियान
• स्कूल-कॉलेजों में प्रतियोगिताएं, दीवार लेखन और जागरूकता कार्यक्रम
MP JalGangaSamvardhan : जल स्रोतों की सफाई, पूजा-अर्चना और संरक्षण का संकल्प
• 19 मार्च से 30 जून तक चल रहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’
• अभियान के तहत 55 जिलों में बड़े स्तर पर किया जा रहा काम
• ग्रामीणों, छात्रों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी
• जल स्रोतों की सफाई, पूजा-अर्चना और संरक्षण का संकल्प
• “जल शक्ति से नव भक्ति” जैसे कार्यक्रमों के जरिए सामाजिक जुड़ाव
• करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत से जल संरक्षण कार्य
• लक्ष्य—जल संकट से राहत, कृषि को मजबूती और स्थायी विकास

