पदस्थापना का बोलवाला, एमपी हाउसिंग बोर्ड में फर्जीवाड़ा

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विभाग में मलाईदार पद स्थापना में भ्रष्टाचार का खुलासा


हाउसिंग बोर्ड में पदों की बंदरबांट

मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं आधारभूत विकास मंडल (हाउसिंग बोर्ड) एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह विकास नहीं, बल्कि कथित भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन की है। हाल ही में सामने आए दस्तावेज़ों और शिकायतों के अनुसार, विभाग के भीतर वरिष्ठता और योग्यता को नजरअंदाज कर मनमाने ढंग से पदभार वितरित किए जा रहे हैं। आरोप है कि मुख्यालय में “पैसे लेकर” पद दिलाने की परंपरा चल रही है।


वरिष्ठता सूची दबाकर चल रहा खेल

  • पदक्रम सूची वेबसाइट पर नहीं: हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने वर्ष 2023 के बाद की पदक्रम सूची (2024 व 2025) को जानबूझकर वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया।
  • कारण: ताकि विभाग में किसे क्या पदभार मिला है, इसकी जानकारी किसी को न मिल सके और अनियमितताएं छुपी रहें।

नियमों को रख दिया ताक पर

  • कमिश्नर की मंजूरी के बिना आदेश: मंडल के नियम 2015 (संशोधित 2022) के मुताबिक, श्रेणी 1 और 2 के पदों पर नियुक्ति का अधिकार केवल हाउसिंग कमिश्नर के पास है।
  • लेकिन वास्तविकता में, कई नियुक्तियां डिप्टी कमिश्नर जैसे अधिकारियों द्वारा की गईं, जो नियम विरुद्ध है।
  • सभी आदेश गुप्त तरीके से निकाले गए, जिन पर न तो कमिश्नर और न ही प्रशासनिक प्रमुख के हस्ताक्षर हैं।

नियम विरुद्ध पदभार के उदाहरण

  1. ESTATE OFFICER (संपदा अधिकारी):
    • श्रेणी-1 का पद है, जो संपत्तियों की रजिस्ट्री, नामांतरण और वित्तीय कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है।
    • यह पद कई जिलों में श्रेणी-3 के कर्मचारियों (जैसे सहायक, वरिष्ठ सहायक) को दे दिया गया।
  2. DIVISIONAL ACCOUNTANT (मण्डलीय लेखापाल):
    • वित्तीय कार्यों और भुगतानों की देखरेख करता है।
    • इसका प्रभार भी अस्थायी और कार्यभारित कर्मचारियों को सौंपा गया है, जो नियमों के खिलाफ है।

योग्यता की अनदेखी, भ्रष्टाचार की पुष्टि

  • राजपत्रित पदों पर अयोग्य अधिकारी: कई ऐसे कर्मचारी, जिन्हें श्रेणी-1 के पदों का प्रभार दिया गया है, वे द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी तक नहीं हैं।
  • विभागीय जांच में फंसे या सजायाफ्ता: इनमें से कई कर्मचारियों पर विभागीय जांच चल रही है, कुछ को तो सजा तक हो चुकी है

योग्य अधिकारी पद से वंचित

  • 2023 में म.प्र. लोक सेवा आयोग के माध्यम से 10 संपदा अधिकारियों की भर्ती हुई थी।
  • लेकिन इन योग्यता प्राप्त अधिकारियों को पदभार देने के बजाय, अन्य अयोग्य कर्मचारियों को प्रभार सौंप दिया गया।

पारदर्शिता पर सवाल, भ्रष्टाचार की आंधी

  • दस्तावेजों से यह साफ जाहिर होता है कि मुख्यालय में बैठे कुछ प्रभावशाली अधिकारियों ने पदों की अदला-बदली को कमाई का जरिया बना लिया है।
  • “सिर्फ जो पैसे देता है, वही प्रभार पाता है” – यह कथन अब आरोप नहीं, दस्तावेजों से प्रमाणित सच्चाई लगती है।

मांग: निष्पक्ष जांच और जवाबदेही

  • इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है।
  • शासन से अपेक्षा है कि वह इन नियम विरुद्ध आदेशों को रद्द कर, पारदर्शी प्रक्रिया से योग्य अधिकारियों की पदस्थापना सुनिश्चित करे।

क्या कार्रवाई होगी या यह भी दबा दिया जाएगा ?

मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड में हो रही यह अनियमितताएं न केवल संगठन की साख को नुकसान पहुंचा रही हैं, बल्कि कर्मचारियों के मनोबल और शासन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रही हैं। देखना यह है कि क्या यह मामला गंभीरता से लिया जाएगा या फाइलों में ही दफन हो जाएगा।

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