BY: Yoganand Shrivastva
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज गंदेरबल जिले के तुलमुल्ला गांव स्थित खीर भवानी मंदिर में दर्शन किए और देवी के चरणों में शीश नवाया। इस अवसर पर उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना भी की। यह मंदिर कश्मीरी पंडितों की कुलदेवी खीर भवानी को समर्पित है, जिन्हें देवी दुर्गा का एक रूप माना जाता है।
हर साल इस मंदिर में विशाल मेला लगता है, जो इस बार 3 जून को आयोजित किया जाएगा। परंपरा के अनुसार, खीर (दूध और चावल से बनी मिठाई) देवी को अर्पित की जाती है, जो इस मंदिर की विशेष पहचान है।
मंदिर का इतिहास
खीर भवानी मंदिर जम्मू-कश्मीर के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। इसका निर्माण 1912 में महाराजा प्रताप सिंह द्वारा करवाया गया था। बाद में महाराजा हरि सिंह ने इसका जीर्णोद्धार कराया। श्रीनगर से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आस्था का केंद्र है।
मंदिर के नाम और मान्यता का महत्व
देवी को खीर का भोग चढ़ाने की परंपरा के कारण इस मंदिर को “खीर भवानी” कहा जाता है। मान्यता है कि यह देवी कश्मीरी हिंदुओं की कुलदेवी हैं और उनके प्रति अगाध श्रद्धा रखी जाती है।
मंदिर से जुड़ी एक रहस्यमयी मान्यता भी है – कहा जाता है कि यहां स्थित पवित्र कुंड का पानी आपदा के समय रंग बदल लेता है। उदाहरण के तौर पर, 2014 में जब कश्मीर में भयंकर बाढ़ आई थी, उससे पहले कुंड का पानी काला हो गया था, जिसे एक अलौकिक संकेत के रूप में देखा गया।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की इस धार्मिक यात्रा को सांप्रदायिक सौहार्द और कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। उनकी यह उपस्थिति आगामी मेले के लिए तैयारियों की शुरुआत का भी संकेत मानी जा रही है।





