BY: Yoganand Shrivastva
लखनऊ : संभल की जामा मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष द्वारा दाखिल सिविल रिवीजन याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे अब जिला अदालत में चल रहे सर्वेक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
हाईकोर्ट ने दी अनुमति, सर्वे जारी रहेगा
जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने सोमवार को यह निर्णय सुनाया। मुस्लिम पक्ष की ओर से अदालत में यह याचिका दाखिल की गई थी कि जिला अदालत में जो सिविल मुकदमा दायर हुआ है, वह “पूजा स्थल अधिनियम 1991” के प्रावधानों के अंतर्गत मान्य नहीं है, और इस कारण से सर्वे कराने का आदेश भी रद्द किया जाना चाहिए। लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया और माना कि दीवानी वाद विचारणीय है तथा सर्वे के आदेश विधिसम्मत हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद उत्तर प्रदेश के संभल जिले के मोहल्ला कोट पूर्वी में स्थित एक धार्मिक स्थल को लेकर है, जिसे वर्तमान में जामा मस्जिद कहा जाता है। हिंदू पक्ष का दावा है कि इस स्थल पर कभी “श्री हरिहर मंदिर” हुआ करता था जिसे ध्वस्त कर मस्जिद बनाई गई। इसी दावे के आधार पर हरिशंकर जैन सहित सात लोगों ने 19 नवंबर 2024 को सिविल कोर्ट में एक याचिका दायर की थी।
अदालत ने उसी दिन एक अधिवक्ता आयुक्त की नियुक्ति कर मस्जिद परिसर का प्रारंभिक सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया था। यह सर्वेक्षण 19 और 24 नवंबर को किया गया और रिपोर्ट 29 नवंबर 2024 तक सौंपने को कहा गया था।
मुस्लिम पक्ष की आपत्ति और कोर्ट की टिप्पणी
मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में यह कहते हुए पुनरीक्षण याचिका दायर की थी कि सिविल कोर्ट में दाखिल मुकदमा विधिसम्मत नहीं है और यह पूजा स्थल अधिनियम 1991 का उल्लंघन करता है, जिसमें 15 अगस्त 1947 की स्थिति को संरक्षित रखने की बात कही गई है। साथ ही उन्होंने अधिवक्ता आयोग की नियुक्ति को भी जल्दबाज़ी में उठाया गया कदम बताया।
कोर्ट ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि अधिवक्ता आयोग की नियुक्ति और सर्वेक्षण विधिक प्रक्रिया के अनुरूप है और दीवानी वाद की पोषणीयता पर आपत्ति का कोई ठोस आधार नहीं है।
ASI और अदालत में अब तक की प्रक्रिया
इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की ओर से भी जवाब दाखिल किया गया था, जिस पर 5 मई को मुस्लिम पक्ष को जवाब देने का अवसर दिया गया। 13 मई को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था, जो अब 19 मई को सुनाया गया।
क्या मांग रहा है हिंदू पक्ष?
हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि उन्हें कथित जामा मस्जिद परिसर में स्थित श्री हरिहर मंदिर में पूजा करने का अधिकार मिलना चाहिए। इसके लिए उन्होंने अदालत से प्रार्थना की थी कि परिसर का गहन सर्वेक्षण हो और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाए।





