1. L&T की नई मासिक धर्म अवकाश नीति
Larsen & Toubro (L&T) के चेयरमैन, एस. एन. सुब्रहमण्यम ने महिलाओं कर्मचारियों के लिए एक दिन का पेड मासिक धर्म अवकाश देने की घोषणा की है। यह कदम इंटरनेशनल वुमन्स डे के मौके पर उठाया गया है।
2. नीति का उद्देश्य और लाभ
L&T की कुल 60,000 कर्मचारियों में से लगभग 9% महिलाएं हैं, जिससे यह नीति लगभग 5,000 महिला कर्मचारियों को लाभ पहुंचाएगी।
3. L&T बन गई पहली बड़ी भारतीय कंपनी
इस घोषणा के साथ, L&T भारत की पहली बड़ी कंपनी बन गई है जिसने अपनी महिला कर्मचारियों के लिए पेड मासिक धर्म अवकाश की व्यवस्था की है।
4. सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
- प्रतिक्रिया: सकारात्मक
सोशल मीडिया पर इस कदम को लेकर काफी चर्चा हो रही है। कई यूज़र्स ने इस नीति की सराहना की और इसे अन्य कंपनियों के लिए एक उदाहरण बताया। एक यूज़र ने लिखा, “L&T की यह पहल एक प्रगतिशील कदम है, जिसे अन्य कंपनियों को भी अपनाना चाहिए।” - स्वागत योग्य कदम
अन्य यूज़र्स ने इसे एक स्वागत योग्य कदम बताया। एक ने कहा, “L&T ने महिलाओं के लिए एक दिन का मासिक धर्म अवकाश दिया है, जो एक अच्छा कदम है। अन्य कंपनियां भी इसे लागू करें।” - लिंग समानता की दिशा में एक कदम
कुछ यूज़र्स ने इसे कार्यस्थल पर लिंग समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य बनाने की बात की।
5. आलोचनाएँ और शंकाएँ
कुछ आलोचकों ने यह सवाल उठाया कि क्या यह कदम एस. एन. सुब्रहमण्यम की 90 घंटे काम करने वाली नीति विवाद के बाद छवि सुधारने का प्रयास था। एक यूज़र ने इसे “अल्पकालिक और अप्रिय” कदम बताया, जबकि कुछ अन्य ने चिंता व्यक्त की कि महिलाएं इस अवकाश को बाद में काम के घंटों में जोड़ने के लिए मजबूर न हों।
6. अन्य राज्य भी लागू कर चुके हैं मासिक धर्म अवकाश
भारत के चार राज्य—बिहार, ओडिशा, सिक्किम और केरल—पहले से ही अपने कर्मचारियों के लिए मासिक धर्म अवकाश की व्यवस्था कर चुके हैं।
7. महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
यह नीति कार्यस्थल पर लिंग समानता और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह अन्य कंपनियों के लिए एक उदाहरण बनेगी।





