भारत की Q3 FY25 जीडीपी: 6.2% वृद्धि के पीछे क्या है?

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भारत की Q3 FY25 जीडीपी: 6.2% वृद्धि के पीछे क्या है?

भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 6.2% की वृद्धि दर्ज की, जो पिछली तिमाही के 5.4% से बेहतर है। यह सुधार अच्छे मानसून के कारण ग्रामीण खपत में वृद्धि और सरकारी व्यय में तेजी के कारण हुआ। हालांकि, वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताएं, खासकर अमेरिकी टैरिफ की चिंताएं, चुनौतियां पेश कर रही हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि महाकुंभ मेले का आयोजन मार्च तिमाही में उपभोग को बढ़ावा देगा, जिससे FY25 में 6.5% की वार्षिक वृद्धि का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।


भारत की आर्थिक स्थिति: तीसरी तिमाही के मुख्य बिंदु

वृद्धि के प्रमुख कारक

  • ग्रामीण मांग में सुधार: अच्छे मानसून ने कृषि उत्पादन को बढ़ाया, जिससे ग्रामीण उपभोग में तेजी आई।
  • सरकारी खर्च में वृद्धि: तीसरी तिमाही में सरकारी व्यय 8.3% बढ़ा, जो पिछली तिमाही के 3.8% से काफी अधिक है।
  • निजी उपभोग: निजी खपत में 6.9% की सालाना वृद्धि हुई, जो त्योहारी सीजन और कम खाद्य मुद्रास्फीति से समर्थित है।
  • निर्यात प्रदर्शन: माल और सेवाओं के निर्यात में मजबूत वृद्धि ने आर्थिक दृष्टिकोण को बेहतर किया।

चुनौतियां और चिंताएं

  • वैश्विक व्यापार जोखिम: अमेरिकी टैरिफ से भारत के निर्यात पर 2-7 अरब डॉलर का असर पड़ सकता है (इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च)।
  • निवेश में कमी: निजी कॉर्पोरेट निवेश में सतर्कता बनी हुई है, जिससे निवेश का हिस्सा कम हो रहा है।

आर्थिक आंकड़े और संशोधन

जीडीपी और जीवीए आंकड़े

  • वास्तविक जीडीपी: FY25 में 6.5% की वृद्धि के साथ ₹187.95 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान।
  • नाममात्र जीडीपी: 9.9% की वृद्धि के साथ ₹331.03 लाख करोड़ तक पहुंचने की संभावना।
  • जीवीए वृद्धि: तीसरी तिमाही में 6.2% की दर से ₹43.13 लाख करोड़ तक पहुंचा।

संशोधित अनुमान

  • FY24 की वृद्धि: पहली संशोधित अनुमानों के अनुसार, वास्तविक जीडीपी वृद्धि 9.2% रही, जो पिछले 12 वर्षों में सबसे अधिक है (पोस्ट-कोविड रिकवरी को छोड़कर)।
  • Q2 FY25 संशोधन: दूसरी तिमाही की वृद्धि को 5.6% तक संशोधित किया गया।

विशेषज्ञों की राय

मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) की भविष्यवाणी

  • वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि चौथी तिमाही में 7.6% की वृद्धि जरूरी है ताकि पूरे साल का लक्ष्य 6.5% हासिल हो सके।
  • महाकुंभ मेले से मार्च तिमाही में उपभोग को बड़ा समर्थन मिलेगा।
  • आरबीआई की सीआरआर और रेपो दर कटौती से तरलता और ऋण वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी

  • FY25 में 6.5% वृद्धि का अनुमान, जो सामान्य मानसून और दर कटौती से समर्थित है।
  • निवेश में नरमी और कॉर्पोरेट सतर्कता चिंता का विषय बनी हुई है।

आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर

  • Q3 में 6.2% की वृद्धि उम्मीद से कम रही (अनुमान 6.4%)।
  • चौथी तिमाही में 6.5-6.9% वृद्धि की संभावना, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताएं प्रभाव डाल सकती हैं।

प्रमुख क्षेत्रों का प्रदर्शन

आठ कोर उद्योगों का सूचकांक

  • जनवरी 2025 में 4.6% की वृद्धि, जिसमें सीमेंट (14.5%) और रिफाइनरी उत्पाद (8.3%) सबसे आगे रहे।
  • कोयला (4.6%), स्टील (3.7%), और बिजली (1.3%) में भी सकारात्मक वृद्धि।

कृषि और विनिर्माण

  • कृषि: 5.6% की वृद्धि, जो पिछली तिमाही के 4.1% से बेहतर है।
  • विनिर्माण: 3.5% की मामूली वृद्धि, जो पिछले 2.2% से थोड़ा अधिक है।

बाजार और वित्तीय स्थिति

स्टॉक मार्केट

  • बीएसई सेंसेक्स 1.9% गिरकर 73,198.1 पर और एनएसई निफ्टी 1.86% गिरकर 22,124.7 पर बंद हुआ।
  • वैश्विक व्यापार युद्ध और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की चिंताओं से बिकवाली बढ़ी।

रुपये का प्रदर्शन

  • अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 87.495 पर बंद हुआ, जो पिछले सत्र के 87.20 से कमजोर है।

विदेशी मुद्रा भंडार

  • 21 फरवरी 2025 तक विदेशी मुद्रा भंडार $4.7 अरब बढ़कर $640.47 अरब हो गया।

राजकोषीय घाटा

  • अप्रैल-जनवरी FY25 में राजकोषीय घाटा ₹11.70 लाख करोड़ रहा, जो वार्षिक लक्ष्य का 74.5% है।

भविष्य का दृष्टिकोण

विशेषज्ञों का अनुमान

  • आरबीआई: FY25 के लिए 6.6% वृद्धि का संशोधित अनुमान।
  • डॉयचे बैंक: अगले वित्त वर्ष में 6.5% वृद्धि की भविष्यवाणी।
  • वर्ल्ड बैंक: भारत को उच्च आय वाले देश बनने के लिए 7.8% की औसत वृद्धि दर जरूरी।

नीतिगत कदम

  • आरबीआई ने $10 अरब की मुद्रा स्वैप के जरिए तरलता बढ़ाई।
  • ब्याज दरों में कटौती और सख्त नियमों में ढील से विकास को समर्थन।

निष्कर्ष

भारत की अर्थव्यवस्था तीसरी तिमाही में मजबूत हुई है, लेकिन वैश्विक जोखिम और निवेश में सुस्ती चुनौतियां बनी हुई हैं। महाकुंभ और सरकारी प्रयासों से चौथी तिमाही में तेजी की उम्मीद है। क्या भारत अपने 6.5% के लक्ष्य को हासिल कर पाएगा? यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।

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