SIR Controversy On SC : प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई, सरकार को नोटिस, विपक्ष को भी नोटिस
रिपोर्ट- प्रमोद श्रीवास्तव
SIR Controversy On SC : नई दिल्ली, विपक्ष का मार्च… सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई… और अब चुनाव आयोग से लेकर केंद्र सरकार तक जवाब तलब! SIR के खिलाफ विपक्षी दलों की लड़ाई अब अदालत के भीतर भी पहुंच गई है। राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने के मामले में राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं को भी नोटिस जारी किया गया है।
दूसरी तरफ, दिल्ली के जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले पर भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। यानी एक तरफ चुनावी प्रक्रिया पर सवाल, दूसरी तरफ विरोध-प्रदर्शन की जगह को लेकर विवाद। अब सड़क पर विरोध, अदालत में सवाल और जवाब का इंतजार। SIR से लेकर जंतर-मंतर तक, अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब पर टिकी हैं।
SIR Controversy On SC : विपक्ष के मार्च पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पक्ष-विपक्ष-चुनाव आयोग से जवाब-तलब
SIR के खिलाफ सियासी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को CJP प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशन और इंटरनेट बंद करने और जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के मामले पर सुनवाई हुई। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर सियासी संग्राम के बीच सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी नोटिस जारी किया। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों से जवाब मांगा है।
अदालत ने मामले को SIR से जुड़ी पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ने का निर्देश भी दिया है। शीर्ष अदालत तक मार्च करने वाले विपक्षी नेताओं को अब सुप्रीम कोर्ट में जवाब देना होगा। राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के नेताओं को नोटिस जारी हुआ है। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने साफ कहा कि न्यायपालिका को कोई दबाव में नहीं ला सकता। अदालत के बाहर क्या बयान दिए जा रहे हैं, और अंदर क्या कहा जा रहा है, कोर्ट सब जानता है।
SIR Controversy On SC : सुनवाई के दौरान CJI का सख्त संदेश
• CJI सूर्यकांत ने कहा — “Nobody can browbeat us”… यानी न्यायपालिका को कोई दबाव में नहीं ला सकता।
• अदालत किसी आइवरी टावर में नहीं बैठी, उसे पता है कि बाहर क्या बयान दिए जा रहे हैं और अदालत के अंदर क्या कहा जा रहा है।
• CJI ने कहा – हम 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई पर केंद्र को नोटिस जारी कर रहे हैं।
उन्हें इसका जवाब देना होगा।
• CJI ने किसी का नाम लिए बिना कहा – याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर सवाल करेंगे और उसे सफाई देनी होगी।
• अदालत ने 12 अक्टूबर की घटना से जुड़ी CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल सामग्री सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया।
• सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने के फैसले पर भी सरकार को नोटिस दिया है
दरअसल 12 अक्टूबर को दिल्ली में विपक्ष का मार्च हुआ, मुद्दा था SIR यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण, राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठाए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध जताया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे इस मार्च पर अब कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के नेताओं के मार्च से जुड़े मामले में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं से जवाब मांगा। याचिका में अदालतों के आसपास राजनीतिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने और अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि अदालत के परिसर और आसपास राजनीतिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए नियम होने चाहिए।
SIR Controversy On SC : याचिकाकर्ताओं के बयान
12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में विपक्षी नेताओं और उनके समर्थकों के जुटने से जुड़े मामले में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य 14 नेताओं को नोटिस जारी किया है। वहीं, SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों के खिलाफ इन नेताओं की याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा।यानी एक तरफ SIR पर कानूनी लड़ाई जारी है, तो दूसरी तरफ अदालत तक मार्च को लेकर भी जवाबदेही का सवाल खड़ा हो गया है। जिस पर बयानबाजी लगातार जारी है।
SIR Controversy On SC : पॉलिटिकल बयान
बहरहाल अब निगाहें इस बात पर हैं कि नोटिस के जवाब में विपक्ष क्या दलील देता है और अदालत आगे क्या रुख अपनाती है। क्योंकि इस पूरे घटनाक्रम में दो सवाल अहम हैं पहला ये कि चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवालों का जवाब क्या मिलेगा, दूसरा ये कि न्यायपालिका के सामने राजनीतिक विरोध की सीमाएं कैसे तय होंगी, साथ ही सवाल ये भी कि SIR की लड़ाई, अब न्यायपालिका और सियासत के टकराव का जो नया मोर्चा बन गया है उसका अंत आखिर क्या और कैसे होगा।
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