रिपोर्ट: उमंग पाण्डेय
Basti Illegal Hospital Case उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में कथित अवैध अस्पताल में गर्भपात के प्रयास के दौरान साढ़े पांच महीने की गर्भवती किशोरी की हालत गंभीर होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि गर्भपात कराने के दौरान किशोरी की आंत और बच्चेदानी को गंभीर नुकसान पहुंचा, जिसके बाद उसे लगातार रक्तस्राव होने लगा। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे। बाद में उसे गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने के लिए ऑपरेशन किया। घटना ने जिले में अवैध चिकित्सा गतिविधियों और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिना पंजीकरण वाले अस्पताल में इलाज कराने का आरोप
Basti Illegal Hospital Case मामला बस्ती जिले के कैली रोड स्थित कथित तौर पर बिना पंजीकरण चल रहे परम अस्पताल से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि साढ़े पांच महीने की गर्भवती किशोरी को गर्भपात कराने के लिए केपी मिश्रा उर्फ सोनू नाम के व्यक्ति के पास ले जाया गया, जिसे झोलाछाप टेक्नीशियन बताया जा रहा है।
बताया गया है कि 9 अक्टूबर की रात गर्भपात का प्रयास किया गया। इसी दौरान किशोरी की हालत बिगड़ गई। आरोप है कि गर्भस्थ शिशु को बाहर निकालने के प्रयास में उसकी आंत और बच्चेदानी को गंभीर क्षति पहुंची। इसके बाद उसे पेट में असहनीय दर्द और लगातार रक्तस्राव की शिकायत होने लगी।
हालत बिगड़ने पर बीआरडी मेडिकल कॉलेज किया गया रेफर
Basti Illegal Hospital Case किशोरी की हालत गंभीर होने पर परिजन उसे पहले बस्ती के कैली मेडिकल कॉलेज ले गए। वहां से उसे बेहतर उपचार के लिए गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। यहां डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने के लिए ऑपरेशन किया।
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ऑपरेशन के दौरान किशोरी की आंत के बड़े हिस्से को निकालना पड़ा। फिलहाल उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। हालांकि, उसकी वर्तमान चिकित्सकीय स्थिति और ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
इंटर कॉलेज में पढ़ती है किशोरी
Basti Illegal Hospital Case जानकारी के मुताबिक, किशोरी बस्ती के कचहरी क्षेत्र की रहने वाली है और शहर के एक इंटर कॉलेज में पढ़ती है। उसके पिता अयोध्या में भूसे की दुकान चलाते हैं। बताया जा रहा है कि पड़ोस में रहने वाले एक युवक से संबंध के बाद किशोरी गर्भवती हो गई थी। इसके बाद परिजन गर्भपात कराने के लिए उसे कथित झोलाछाप के पास ले गए।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित अस्पताल बिना पंजीकरण के संचालित हो रहा था, तो वहां चिकित्सा गतिविधियां कैसे जारी थीं। साथ ही, गर्भपात जैसे संवेदनशील और जोखिमपूर्ण चिकित्सकीय कार्य को कथित तौर पर अयोग्य व्यक्ति द्वारा किए जाने के आरोपों की जांच भी महत्वपूर्ण है।
मामले में संबंधित व्यक्ति की चिकित्सकीय योग्यता, अस्पताल के पंजीकरण, गर्भपात के प्रयास की परिस्थितियों और उपचार के दौरान हुई कथित लापरवाही की जांच की आवश्यकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी की जिम्मेदारी या दोष को अंतिम रूप से तय नहीं किया जा सकता।
जांच और कार्रवाई पर टिकी नजरें
किशोरी की गंभीर हालत ने उसके परिवार को संकट में डाल दिया है। वहीं, इस घटना ने अवैध चिकित्सा गतिविधियों पर नियंत्रण और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं। जांच और चिकित्सकीय दस्तावेज सामने आने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।


