Report: Pradeep bansal
Machalpur Tehsildar राजगढ़ जिले के माचलपुर उपतहसील कार्यालय में शुक्रवार को कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के निरीक्षण के दौरान प्रभारी तहसीलदार सुनील वर्मा अनुपस्थित मिले। निरीक्षण के समय कलेक्टर ने कार्यालय में मौजूद बाबू से लंबित राजस्व प्रकरणों, आवेदनों और कार्यालयीन व्यवस्थाओं की जानकारी ली तथा आवश्यक निर्देश दिए।
माचलपुर उपतहसील कार्यालय से लगभग 122 गांव जुड़े हुए हैं। यहां राजस्व प्रकरणों, जाति, आय एवं निवास प्रमाण-पत्र सहित विभिन्न शासकीय कार्यों के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं। ऐसे में अधिकारी की नियमित उपलब्धता को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार उन्हें अपने कार्यों के लिए कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं।
पहले भी सामने आ चुकी हैं शिकायतें
Machalpur Tehsildar करीब दस दिन पहले भी उपतहसील कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति का मामला चर्चा में आया था। उस दौरान आवेदन लेने के लिए भी कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं होने की शिकायत सामने आई थी। मामला प्रशासन तक पहुंचने के बाद व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कलेक्टर के निरीक्षण के दौरान ही प्रभारी तहसीलदार का अनुपस्थित मिलना फिर चर्चा का विषय बन गया।
जनविश्वास अभियान में भी उठे थे सवाल
Machalpur Tehsildar प्रभारी तहसीलदार सुनील वर्मा की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत गोगटपुर में आयोजित जनसमस्या शिविर में भी सवाल उठे थे। कार्यक्रम के दौरान विधायक हजारीलाल दांगी ने किसानों के प्रकरणों के निराकरण को लेकर नाराजगी जताई थी। वहीं एक फरियादी ने भी मंच से तहसीलदार पर डराने-धमकाने के आरोप लगाए थे। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
ग्रामीणों को समय पर राहत मिले, यही बड़ी चुनौती
Machalpur Tehsildar प्रशासन लगातार ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित समाधान का दावा कर रहा है, लेकिन उपतहसील स्तर पर अधिकारियों की उपलब्धता को लेकर उठ रहे सवाल व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर कर रहे हैं। 122 गांवों की जिम्मेदारी वाले कार्यालय में अधिकारी की नियमित मौजूदगी ग्रामीणों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कलेक्टर के निरीक्षण के बाद अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि इन निर्देशों का कितना असर दिखाई देता है और ग्रामीणों को अपने राजस्व संबंधी कार्यों के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने से कब राहत मिलती है।


