Trump 100 Percent Tariff on India : रूस से रिश्ते, BRICS की ताकत, भारत निशाना ?भारत-अमेरिका द्विपक्षीय रिश्तों में बढ़ेगा तनाव ?
Trump 100 Percent Tariff on India : एजेंडा में आज बात डोनाल्ड ट्रंप का 100 फीसदी टैरिफ फार्मूले की, बात रूस पर प्रतिबंध वाले अमेरिकी सीनेट में पास हुए बिल की, और ट्रंप को मिली खुली छूट की…रूस पर दबाव बनाने के मकसद से लाए गए अमेरिकी टैरिफ बिल ने भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्तों में एक नया तनाव पैदा कर दिया है। दोनों देशों के बीच पहले से ही अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। इस बिल ने इसे और भी जटिल बना दिया है। क्योंकि यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के सामान पर 100% टैरिफ लगाने की मंजूरी देता है, जो रूसी तेल और गैस के शीर्ष 5 आयातक हैं। इनमें भारत और चीन भी शामिल हैं। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी हालत में नहीं झुकेगा, और अपनी ऊर्जा जरूरत पूरी करता रहेगा। लेकिन भविष्य में किसी भारतीय उत्पाद पर 100% अमेरिकी टैरिफ लगाया जाता है, तो अमेरिकी आयातक के लिए उस सामान की लागत बढ़ सकती है। इसका असर भारतीय निर्यातकों के ऑर्डर, मार्जिन और अमेरिकी बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है। खासकर उन MSME और श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए दबाव बढ़ सकता है जिनकी बिक्री अमेरिकी बाजार पर अधिक निर्भर है। ऐसे में भारत के लिए सबसे सीधा रास्ता अमेरिका के साथ व्यापार और ऊर्जा संबंधी बातचीत जारी रखना है। दोनों देशों के बीच पहले से ही बड़े स्तर का व्यापार है और फरवरी 2026 में दोनों पक्षों ने व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में भी कदम बढ़ाया था। ऐसे में बड़ा सवाल यही है क्या भारत के पास वैकल्पिक रास्ते क्या हैं। यदि ट्रंप का 100 % टैरिफ हथियार है, जिस पर भारत की दो टूक, कि भारत राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। अब टैरिफ पर ट्रंप की दादागिरी है, और भारत अपने हितों पर अडिग… इसी विषय पर चर्चा करेंगे लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।।।।
Trump 100 Percent Tariff on India : रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल को अमेरिकी सीनेट ने पास कर दिया है। यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत समेत 5 देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की मंजूरी देता है, जो रूस के टॉप 5 ऊर्जा आयातक हैं। तर्क दिया गया है कि इससे रूस की पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से होने वाली कमाई कम होगी और मॉस्को पर यूक्रेन युद्ध को खत्म करने का दबाव बढ़ेगा। इस समय चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस के शीर्ष 5 ऊर्जा खरीदार हैं। यह बिल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और शीर्ष सैन्य कमांडरों पर नए प्रतिबंध और वीजा बैन लगाएगा। इसके साथ ही रूसी निर्यात पर 500 % तक टैरिफ भी लगाएगा। रूस पर प्रतिबंध के अलावा यह बिल ईरान के खिलाफ भी प्रावधान करता है। यह उन कंपनियों पर जुर्माना लगाता है जो ईरान के ऊर्जा सेक्टर में निवेश करती हैं। बात भारत की करें तो इससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों पर दबाव बढ़ गया है, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देश व्यापार समझौतों पर चर्चा कर रहे हैं। भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता अंतिम दौर में है। इस नए टैरिफ कानून के बाद अमेरिका इस खतरे का इस्तेमाल भारत पर दबाव बनाने और अपनी शर्तों पर समझौता करने के लिए कर सकता है। अब ट्रंप के हाथ में 100 % टैरिफ का हथियार… रूस से तेल खरीदने पर भारत पर कितना दबाव ? क्या महंगा होगा तेल, क्या प्रभावित होगा अमेरिका को निर्यात और क्या बढ़ेगी भारत की मुश्किल ? भारत पर संभावित असर पर डालते हैं एक नजर…
Trump 100 Percent Tariff on India : अमेरिकी टैरिफ नीतियों का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पड़ेगा। डोनाल्ड ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति और टैरिफ को एक आर्थिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने के तरीके ने वैश्विक व्यापार और भारत-अमेरिका संबंधों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी की है। लेकिन भारत ने भी अपना मत स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा और ऊर्जा के साथ ही किसी भी तरह के भारतीय हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। लेकिन इस मुद्दे पर कांग्रेस सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर रही है।हालांकि बिल में 100% की अधिकतम सीमा है; भारत पर अपने-आप 100% शुल्क लागू होने का प्रावधान नहीं है। लेकिन भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी 1.4 अरब की आबादी की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए बाजार की स्थिति और विविधता के आधार पर तेल आयात जारी रखेगा। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 45% से 51% कच्चा तेल अकेले रूस से आयात कर रहा है। भारत ने कहा, ‘हाल के महीनों में अमेरिकी सरकार के अलग-अलग प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। भारत की ओर से इस क़ानून के संभावित प्रभावों को, न केवल द्विपक्षीय संबंधों बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिहाज से भी, स्पष्ट रूप से सामने रखा गया है। भारत ने अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी ज़रूरी क़दम उठाने का अपना संकल्प भी स्पष्ट कर दिया है। लेकिन बड़े सवाल यही है कि ट्रंप का 100 परसेंट टैरिफ, व्यापार से ऊर्जा सुरक्षा तक भारत के लिये कितनी बड़ी चुनौती होगा, क्या अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता से समाधान कोई निकलेगा ? और क्या नए वैश्विक बाजार और व्यापार साझेदारों की तलाश, भारत के लिये नए द्वार खुलेगे।
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