Tribal Healers Master Trainers : जनजातीय समाज के पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने की तैयारी
Tribal Healers Master Trainers : मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय समुदायों के पीढ़ियों पुराने पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित और व्यवस्थित तरीके से दस्तावेजीकृत करने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजातीय समुदाय सदियों से प्रकृति और औषधीय वनस्पतियों से जुड़े ज्ञान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाते आए हैं। इस ज्ञान के संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण को सरकार महत्वपूर्ण मान रही है।मुख्यमंत्री के मुताबिक जनजातीय समाज के पास प्राकृतिक और औषधीय वनस्पतियों, खेती-किसानी, जंगल और लोकजीवन से जुड़ा व्यापक देशज ज्ञान मौजूद है। अभी तक इसका बड़ा हिस्सा मौखिक परंपराओं के माध्यम से आगे बढ़ता रहा है। सरकार की कोशिश है कि इस ज्ञान को व्यवस्थित रूप से दर्ज किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इससे परिचित हो सकें।
Tribal Healers Master Trainers : जनजातीय वैद्यों के ज्ञान को किया जाएगा अभिलेखबद्ध
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनजातीय समुदायों के अनुभवी बुजुर्ग और पारंपरिक ज्ञानधारक वन, औषधीय पौधों, खेती और पर्यावरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी रखते हैं। इस ज्ञान को व्यवस्थित रूप से रिकॉर्ड करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन राज्य सरकार ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।सरकार की योजना जनजातीय समुदाय के पारंपरिक वनवासी वैद्यों, तड़वी, भुमका, बरवा, ओझा और गुनिया सहित अन्य वरिष्ठ ज्ञानधारकों तक पहुंच बनाने की है। प्राकृतिक कंद-मूल, जड़ी-बूटियों और औषधीय वनस्पतियों से जुड़े उनके अनुभवों और पारंपरिक उपचार संबंधी जानकारी को दस्तावेज के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
Tribal Healers Master Trainers : टीआरआई-भोपाल को सौंपी गई अहम जिम्मेदारी
पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण के लिए जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्था यानी टीआरआई-भोपाल को जिम्मेदारी दी गई है। संस्था के माध्यम से जनजातीय समुदायों में मौजूद पारंपरिक ज्ञानधारकों की पहचान और उनसे संबंधित जानकारी जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य जनजातीय समाज के ज्ञान को सम्मान के साथ सुरक्षित करना है। इसके साथ ही इस ज्ञान को व्यवस्थित तरीके से अभिलेखबद्ध कर भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
Tribal Healers Master Trainers : मध्यप्रदेश के 34 जिलों से चुने जाएंगे 640 ट्राईबल हीलर्स
राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश से करीब 640 जनजातीय वैद्यों यानी ‘ट्राईबल हीलर्स’ को ‘मास्टर ट्रेनर्स’ के रूप में तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रदेश के इंदौर, जबलपुर, शहडोल, नर्मदापुरम्, रीवा, ग्वालियर-चंबल, भोपाल और उज्जैन संभाग के कुल 34 जिलों को शामिल किया गया है।इन ट्राईबल हीलर्स की क्षमता निर्माण के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार के अनुसार आगे चलकर इस संख्या में बढ़ोतरी की संभावना भी है। जून 2026 के अंत तक मध्यप्रदेश से 101 ट्राईबल हीलर्स के नाम मास्टर ट्रेनर्स की ट्रेनिंग के लिए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं।
Tribal Healers Master Trainers : जिलों से मांगे जा रहे योग्य ट्राईबल हीलर्स के नाम
राज्य शासन ने संबंधित कलेक्टरों और जनजातीय कार्य विभाग के जिला अधिकारियों को ट्राईबल हीलर्स के नाम भेजने के निर्देश दिए हैं। चयन के लिए ऐसे जनजातीय वैद्यों और चिकित्सकों की पहचान की जा रही है, जो अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित हों और अपने समुदाय में पारंपरिक उपचार के क्षेत्र में स्थापित पहचान रखते हों।ऐसे लोगों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है, जो अपने अनुभव और ज्ञान को दूसरे लोगों तक पहुंचाने और उन्हें प्रशिक्षित करने की क्षमता रखते हों। इसके अलावा अलग-अलग पारंपरिक उपचार विधाओं में विशेषज्ञता रखने वाले ज्ञानधारकों के नाम भी मांगे गए हैं।
Tribal Healers Master Trainers : जड़ी-बूटी से लेकर सर्पदंश उपचार तक विशेषज्ञों का चयन
ट्राईबल हीलर्स के चयन में पारंपरिक उपचार की विभिन्न विधाओं को शामिल किया जा रहा है। इनमें जड़ी-बूटी आधारित उपचार, अस्थि चिकित्सा यानी बोन-सेटिंग, प्रसूति से संबंधित पारंपरिक अनुभव और सर्पदंश उपचार जैसी विधाएं शामिल हैं।इस प्रक्रिया के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों और उपचार पद्धतियों से जुड़े पारंपरिक ज्ञान को रिकॉर्ड करने की कोशिश की जा रही है। इसका उद्देश्य जनजातीय समुदायों में लंबे समय से मौजूद अनुभव और ज्ञान को व्यवस्थित रूप से दर्ज करना है।
Tribal Healers Master Trainers : केंद्र सरकार चला रही ‘नेशनल प्रोग्राम ऑन कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफ ट्राइबल हीलर्स’
केंद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने भी जनजातीय समुदायों के पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के दस्तावेजीकरण और प्रशिक्षण के लिए देशव्यापी पहल शुरू की है। जनजातीय कार्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत ‘नेशनल प्रोग्राम ऑन कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफ ट्राइबल हीलर्स’ संचालित किया जा रहा है।इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का लक्ष्य देशभर में जनजातीय समुदायों से जुड़े वैद्यों के 5,000 प्रशिक्षित ‘मास्टर ट्रेनर्स’ का कैडर तैयार करना है। इसके तहत ऐसे पारंपरिक वैद्यों का चयन किया जा रहा है, जिन्हें अपने समुदाय में उपचार पद्धतियों का अनुभव है और जो आगे अन्य लोगों को प्रशिक्षण दे सकते हैं।
Tribal Healers Master Trainers : अलग-अलग जनजातियों और उपचार पद्धतियों को मिलेगा प्रतिनिधित्व
राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत ट्राईबल हीलर्स के चयन में जिलों, जनजातीय समुदायों और पारंपरिक उपचार विधाओं में विविधता रखने पर जोर दिया जा रहा है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित देशज चिकित्सा ज्ञान को दस्तावेजीकृत करने में मदद मिल सकती है।मध्यप्रदेश में भी इसी प्रक्रिया के तहत विभिन्न जिलों से पारंपरिक ज्ञान रखने वाले लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। राज्य सरकार का कहना है कि इस पहल के माध्यम से जनजातीय समाज की पारंपरिक ज्ञान-सम्पदा को आने वाली पीढ़ियों तक व्यवस्थित तरीके से पहुंचाने का रास्ता मजबूत होगा।
Tribal Healers Master Trainers : पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनजातीय समाज की ज्ञान-सम्पदा केवल एक समुदाय की विरासत नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत से भी जुड़ी हुई है। सरकार का प्रयास है कि सदियों से चली आ रही मौखिक परंपराओं में मौजूद जानकारी को वैज्ञानिक तरीके से दस्तावेजीकृत किया जाए।मध्यप्रदेश में 640 ट्राईबल हीलर्स को मास्टर ट्रेनर्स के रूप में तैयार करने की योजना इसी व्यापक पहल का हिस्सा है। इससे पारंपरिक ज्ञानधारकों की पहचान, उनके अनुभवों का दस्तावेजीकरण और ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रक्रिया को संस्थागत रूप देने की कोशिश की जा रही है।


