Snake Procession: ऋषि पंचमी पर निकाली गई सांपों की शोभायात्रा
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर क्षेत्र स्थित देवरी गांव में ऋषि पंचमी के अवसर पर सांपों की अनोखी शोभायात्रा निकाली गई। सांपों की पूजा और उनसे जुड़ी ग्रामीणों की आस्था को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग देवरी पहुंचे। इस दौरान गांव में सांपों की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
Snake Procession: घरों में निकलने वाले सांपों को पकड़कर करते हैं संरक्षण
सांवरा समिति के सदस्यों के मुताबिक गांव और आसपास के घरों में निकलने वाले सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जाता है। इसके बाद उनकी पूजा-अर्चना कर उन्हें सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया जाता है। समिति का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य सांपों को मारने के बजाय उनका संरक्षण करना है।
Snake Procession: ग्रामीणों की सांपों को लेकर गहरी आस्था
देवरी गांव में सांपों को लेकर ग्रामीणों के बीच लंबे समय से विशेष आस्था बताई जाती है। ग्रामीणों की मान्यता है कि अब तक गांव में सांपों के कारण कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। ऋषि पंचमी के मौके पर इसी आस्था के साथ सांपों की पूजा की जाती है और शोभायात्रा निकाली जाती है।
देवरी में चलती है सांप पकड़ने और संरक्षण की पाठशाला
देवरी गांव में सांवरा गुरु पाठशाला भी संचालित होती है, जहां सांपों को पकड़ने और उनके संरक्षण की शिक्षा दिए जाने की बात समिति की ओर से कही गई है। समिति के प्रमुख कमलेश गुरु के अनुसार, पिछले कई वर्षों से लोगों को सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने की शिक्षा दी जा रही है।
Snake Procession: 500 से ज्यादा सांपों को सुरक्षित जंगल में छोड़ा
सांवरा समिति के प्रमुख कमलेश गुरु ने बताया कि अब तक 500 से अधिक सांपों को पकड़ा जा चुका है और उन्हें सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ा गया है। उनका कहना है कि सांपों को नुकसान पहुंचाने के बजाय उन्हें बचाना और सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़ना ही समिति का उद्देश्य है।
Snake Procession: शोभायात्रा देखने हजारों लोग पहुंचे देवरी
ऋषि पंचमी के अवसर पर आयोजित इस विशेष आयोजन को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोगों के देवरी पहुंचने की बात सामने आई। सांपों की पूजा, शोभायात्रा और संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां आयोजन का मुख्य आकर्षण रहीं।
Snake Procession: आस्था के साथ संरक्षण का संदेश
देवरी में आयोजित सांपों की शोभायात्रा धार्मिक आस्था के साथ वन्यजीव संरक्षण का संदेश भी देती है। सांवरा समिति के सदस्यों के अनुसार घरों में पहुंचने वाले सांपों को मारने के बजाय सुरक्षित तरीके से पकड़कर जंगल में छोड़ने का प्रयास किया जाता है। गांव में सांपों को लेकर लोगों की अटूट आस्था के साथ उनके संरक्षण की पहल भी जारी है।
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