by: vijay yadav
White House : वॉशिंगटन, ईरान युद्ध से जुड़ी संवेदनशील सैन्य जानकारियों के मीडिया में सामने आने के बाद अमेरिकी प्रशासन ने कथित तौर पर अधिकारियों के बीच सूचना लीक करने वाले लोगों की पहचान करने के लिए बड़ा कदम उठाया। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान के कम से कम 50 अधिकारियों और कर्मचारियों से पॉलीग्राफ यानी लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया गया। हालांकि, अब इस गोपनीय जांच की जानकारी भी मीडिया तक पहुंच गई है, जिससे व्हाइट हाउस के लीक रोकने के अभियान पर ही सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन का मकसद यह पता लगाना था कि ज्वाइंट स्टाफ में से कौन-कौन संवेदनशील और वर्गीकृत सैन्य सूचनाएं मीडिया तक पहुंचा रहा है। जांच का एक उद्देश्य कथित तौर पर दूसरे अधिकारियों को यह संदेश देना भी था कि गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करने की कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा।

White House : ईरान युद्ध से जुड़ी खबरों के बाद शुरू हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई जब कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना के कुछ महत्वपूर्ण हथियार भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। संवेदनशील सैन्य जानकारी के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासन ने संभावित लीक के स्रोत की तलाश तेज कर दी।
ज्वाइंट स्टाफ में करीब 1,500 से 2,000 अधिकारी और कर्मचारी होते हैं। यह संगठन दुनिया भर में अमेरिकी सैन्य कमांडरों के साथ नीति, अभियान और युद्ध संबंधी योजनाओं के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका नेतृत्व जनरल डैन केन करते हैं और यह रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की निगरानी में काम करता है।

White House : पेंटागन ने जांच पर टिप्पणी से किया इनकार
पॉलीग्राफ टेस्ट से जुड़े सवालों पर पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने आंतरिक कर्मचारियों या जांच से संबंधित मामलों पर टिप्पणी करने से इनकार किया। हालांकि उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी वर्गीकृत जानकारी की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है और ऐसी सूचनाओं के लीक होने की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाता है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा केवल सरकारी प्रतिष्ठानों के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
White House : वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर इतनी व्यापक जांच को बताया गया अभूतपूर्व
रिपोर्ट में अमेरिकी नौसेना के रियर एडमिरल डोनाल्ड जे. गुटर के हवाले से कहा गया है कि इतने बड़े स्तर पर और इतने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच पॉलीग्राफ टेस्ट कराए जाने की घटना असाधारण है। उनके मुताबिक, उन्होंने इससे पहले इतनी व्यापकता और वरिष्ठता वाले स्तर पर इस तरह की जांच नहीं देखी थी।
इसी वजह से इस कार्रवाई को अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान में लीक के खिलाफ प्रशासन की अब तक की सबसे कड़ी कोशिशों में से एक माना जा रहा है।
White House : ट्रंप ने लीक करने वालों पर कार्रवाई का समर्थन किया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से गोपनीय सरकारी और सैन्य सूचनाओं के मीडिया में पहुंचने को लेकर सख्त रुख अपनाते रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने लीक से जुड़ी मीडिया कवरेज को बेहद गंभीर बताते हुए इसे ‘देशद्रोही’ तक कहा है।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी पिछले कई महीनों से कथित लीक के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चर्चा में रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उन्होंने कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की पदोन्नति रोकने या उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया का समर्थन किया।
White House : पहले भी पॉलीग्राफ टेस्ट की दी गई थी चेतावनी
यह पहली बार नहीं है जब हेगसेथ की ओर से लीक की जांच के लिए लाई डिटेक्टर टेस्ट की बात सामने आई हो। मार्च 2025 में पेंटागन से जुड़ी एक संवेदनशील जानकारी मीडिया में आने के बाद कथित तौर पर उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की चेतावनी दी थी।
उस समय एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पेंटागन चीन से जुड़ी सैन्य योजनाओं को लेकर टेस्ला के सीईओ और उस समय ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ सलाहकार रहे एलन मस्क को जानकारी देने की तैयारी कर रहा था। इस खबर के सामने आने के बाद पेंटागन में लीक को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
White House : अब जांच की जानकारी ही बनी नई लीक
व्हाइट हाउस की मौजूदा कार्रवाई का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि जिस अभियान का उद्देश्य गोपनीय जानकारी के लीक होने का स्रोत तलाशना था, उसी अभियान से जुड़ी संवेदनशील जानकारी अब मीडिया रिपोर्टों का हिस्सा बन गई है।
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