S Jaishankar: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर इन दिनों यूक्रेन की यात्रा पर हैं। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने गुरुवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के साथ-साथ खाद्य आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और युद्ध के कारण पैदा हुई अन्य चुनौतियों को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई।
बैठक के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भारत के रुख की सराहना की और युद्ध को समाप्त करने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता के लिए आभार जताया। जेलेंस्की ने कहा कि भारत ने संघर्ष को लेकर अपना रुख स्पष्ट रखा है और शांति की जरूरत को लगातार रेखांकित किया है।
इस मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष लगातार जारी है और युद्ध को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं।
S Jaishankar: भारत के रुख के लिए जेलेंस्की ने जताया आभार
I met with India’s Minister of External Affairs @DrSJaishankar. We discussed important issues. We are grateful to India for its commitment to ending this unjust war – Russia’s war against Ukraine. This certainly must not be a time of war. Peace is needed. This is India’s clear… pic.twitter.com/ZJ4IRP7Qpx
— Volodymyr Zelenskyy / Володимир Зеленський (@ZelenskyyUa) September 3, 2026
जयशंकर के साथ बैठक के बाद राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने विशेष रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों को लेकर भारत के रुख की सराहना की।
जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन भारत के उस प्रयास को महत्व देता है, जिसमें युद्ध को समाप्त करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही गई है। उनके मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में युद्ध को जारी रखना समाधान नहीं है और स्थायी शांति के लिए गंभीर प्रयास किए जाने की जरूरत है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने भारत के रुख को स्पष्ट बताते हुए उम्मीद जताई कि दुनिया की अन्य बड़ी शक्तियां भी युद्ध को समाप्त करने और भरोसेमंद शांति स्थापित करने के पक्ष में स्पष्ट भूमिका निभाएंगी।
S Jaishankar की मौजूदगी के दौरान यूक्रेन में ड्रोन हमला
जेलेंस्की ने बैठक के दौरान एक और महत्वपूर्ण बात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस समय विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारतीय प्रतिनिधिमंडल कीव में मौजूद था, उसी दौरान रूस की ओर से एक बार फिर ड्रोन हमला किया गया।
जेलेंस्की के मुताबिक, इन ड्रोन को ईरान की मदद से तैयार किया गया था। उन्होंने बताया कि यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने बड़ी संख्या में ड्रोन को रोकने में सफलता हासिल की, जिससे भारतीय प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध की वास्तविक स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। उन्होंने यह भी दोहराया कि मौजूदा हालात में शांति की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है।
S Jaishankar: ब्लैक सी में खाद्य आपूर्ति और जहाजों की सुरक्षा पर चर्चा
जयशंकर और जेलेंस्की की बातचीत में ब्लैक सी की स्थिति भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। दोनों पक्षों ने समुद्री रास्तों से होने वाले व्यापार और आम नागरिकों के जहाजों के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की।
जेलेंस्की ने कहा कि ब्लैक सी के रास्ते खाद्य सामग्री और दूसरी आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही कई लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में समुद्री मार्गों पर किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों के लोग समुद्री रास्तों के जरिए खाद्य और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति पर निर्भर हैं, वहां सप्लाई बाधित होना स्वीकार नहीं किया जा सकता। यूक्रेन का आरोप है कि उसके बंदरगाहों और खाद्य आपूर्ति से जुड़े मार्गों पर हमलों और अवरोधों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हुई है।
जेलेंस्की ने समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, ब्लैक सी में स्थिरता और सुरक्षित व्यापारिक रास्तों के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना होगा।
S Jaishankar ने दोहराया- यह युद्ध का समय नहीं
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी यूक्रेन यात्रा के दौरान भारत के उस रुख को दोहराया कि मौजूदा दौर युद्ध का नहीं है। उन्होंने कहा कि संघर्ष को आगे बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा और युद्ध के मैदान से स्थायी समाधान की उम्मीद नहीं की जा सकती।
जयशंकर ने कहा कि युद्ध का हर गुजरता दिन अपने साथ और अधिक मौतें, नुकसान और तबाही लेकर आता है। इसलिए संघर्ष से जुड़े पक्षों को बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान तलाशना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम समाधान उन्हीं पक्षों को निकालना होगा जो इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं। हालांकि, भारत अपनी क्षमता के अनुसार शांति की दिशा में किसी भी तरह की मदद करने के लिए तैयार है।
S Jaishankar: प्रधानमंत्री मोदी के रुख का भी किया जिक्र
जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मुलाकात हुई थी। इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी युद्ध समाप्त करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया था।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश रहा है कि युद्ध से किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता और बातचीत के जरिए रास्ता तलाशना जरूरी है। जयशंकर ने यूक्रेन में इसी व्यापक भारतीय रुख को आगे बढ़ाया और कहा कि भारत लगातार संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान की वकालत करता रहा है।
S Jaishankar: यूक्रेन के विदेश मंत्री से भी मिले जयशंकर
राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ मुलाकात से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन के अपने समकक्ष आंद्री सिबिहा के साथ भी बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
जयशंकर की यूक्रेन यात्रा को भारत की उस कूटनीतिक नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें नई दिल्ली रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संवाद बनाए रखने पर जोर देता रहा है।
भारत ने शुरुआत से ही संघर्ष को लेकर बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की बात कही है। नई दिल्ली का रुख यह रहा है कि शांति का रास्ता बातचीत से ही निकलेगा और युद्ध के कारण होने वाली मानवीय क्षति को कम करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
S Jaishankar: युद्ध के बीच भारत की भूमिका पर दुनिया की नजर
रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच भारत की संतुलित कूटनीतिक भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। भारत के रूस के साथ पुराने रणनीतिक संबंध हैं, वहीं यूक्रेन के साथ भी नई दिल्ली अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ऐसे में जयशंकर की यूक्रेन यात्रा और जेलेंस्की के साथ उनकी मुलाकात को दोनों देशों के बीच संवाद के लिहाज से अहम माना जा रहा है। जेलेंस्की की ओर से भारत के रुख की सराहना यह संकेत देती है कि यूक्रेन भी नई दिल्ली की कूटनीतिक भूमिका को महत्व दे रहा है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि भारत आने वाले समय में रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर अपनी कूटनीतिक पहल को किस तरह आगे बढ़ाता है और क्या दोनों पक्षों के बीच शांति की दिशा में कोई ठोस रास्ता निकल पाता है।


