Raksha Bandhan 2026 : रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का पर्व है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और भाई उसकी सुरक्षा व सम्मान का संकल्प लेता है। भगवान श्रीराम और उनके भाइयों की कथा तो लगभग सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि रामायण की कुछ परंपराओं में भगवान श्रीराम की एक बड़ी बहन का भी उल्लेख मिलता है? उनका नाम था शांता।
शांता की कथा बेहद रोचक होने के साथ-साथ त्याग, पारिवारिक प्रेम और जिम्मेदारी से जुड़ी हुई है। हालांकि वाल्मीकि रामायण में शांता का विस्तृत चरित्र प्रमुख रूप से सामने नहीं आता। उनके बारे में जानकारी मुख्य रूप से बाद की रामायण परंपराओं, पुराणों और लोककथाओं में मिलती है। इसलिए शांता से जुड़ी सभी कथाओं को एक समान ऐतिहासिक तथ्य मानने के बजाय अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के रूप में समझना उचित है।

Raksha Bandhan 2026 : राजा दशरथ की बड़ी बेटी थीं शांता?
प्रचलित कथा के अनुसार शांता राजा दशरथ और कौशल्या की पुत्री थीं और भगवान श्रीराम से बड़ी थीं। कहा जाता है कि बचपन में ही उनके जीवन में ऐसा मोड़ आया, जिसने उन्हें अयोध्या से दूर कर दिया।
कथा के मुताबिक कौशल्या की बहन वर्षिणी और उनके पति रोमपाद अंगदेश के राजा-रानी थे। दोनों संतान प्राप्ति की इच्छा रखते थे, लेकिन उनके यहां संतान नहीं थी। एक अवसर पर वर्षिणी ने शांता को देखा और उनके प्रति स्नेह व्यक्त किया। तब दशरथ ने अपनी पुत्री शांता को उन्हें सौंपने का वचन दिया।
इसके बाद शांता अंगदेश चली गईं और वहीं राजकुमारी के रूप में उनका पालन-पोषण हुआ। लोक परंपराओं में उन्हें अत्यंत विदुषी, संस्कारी और प्रतिभाशाली बताया गया है।
Raksha Bandhan 2026 : शांता का विवाह ऋषि श्रृंगी से कैसे हुआ?
शांता के जीवन से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा उनके विवाह की है। कहा जाता है कि उनका विवाह महान ऋषि श्रृंगी से हुआ था। ऋषि श्रृंगी अत्यंत तपस्वी और विद्वान माने जाते थे।
शांता और श्रृंगी के विवाह की कथा कई धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग रूप में मिलती है। कुछ कथाओं में कहा जाता है कि शांता ने स्वयं ऋषि श्रृंगी को पति के रूप में स्वीकार किया था, जबकि कुछ लोककथाएं इस विवाह को अंगदेश की परिस्थितियों से जोड़ती हैं।
विवाह के बाद शांता ने ऋषि श्रृंगी के साथ तप और धार्मिक जीवन बिताया। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू क्षेत्र में शांता और श्रृंगी से जुड़ी धार्मिक परंपरा आज भी देखने को मिलती है।
Raksha Bandhan 2026 : अकाल और ऋषि श्रृंगी की कथा
शांता से जुड़ी एक अन्य प्रसिद्ध कहानी अंगदेश के राजा रोमपाद के समय पड़े भयंकर सूखे से संबंधित है। लोककथा के अनुसार राज्य में लंबे समय तक बारिश नहीं हुई और प्रजा परेशान हो गई।
तब राजा रोमपाद को सलाह दी गई कि महान तपस्वी ऋषि श्रृंगी को अंगदेश लाया जाए। मान्यता थी कि उनके आने से वर्षा होगी और राज्य की समस्या दूर हो जाएगी। कथा के अलग-अलग संस्करणों में ऋषि श्रृंगी को अंगदेश लाने की परिस्थितियां अलग बताई गई हैं। अंततः उनके आगमन के बाद वर्षा होने और राज्य में खुशहाली लौटने की बात कही जाती है।
इसी वजह से श्रृंगी ऋषि का नाम अंगदेश की धार्मिक परंपराओं में विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है।

श्रीराम के जन्म से भी जुड़ता है शांता और श्रृंगी का प्रसंग
शांता की कथा का सबसे महत्वपूर्ण संबंध भगवान श्रीराम के जन्म से जोड़ा जाता है। रामायण परंपरा के अनुसार राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया था। इस यज्ञ के ऋत्विज के रूप में ऋष्यशृंग यानी श्रृंगी ऋषि का उल्लेख वाल्मीकि रामायण के बालकांड में मिलता है।
यज्ञ के बाद दशरथ को दिव्य पायस प्राप्त हुआ, जिसे उन्होंने अपनी रानियों में बांटा। इसी के परिणामस्वरूप राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। बाद की लोककथाओं में शांता और श्रृंगी के संबंध को इस प्रसंग से और अधिक विस्तार दिया गया है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि वाल्मीकि रामायण में शांता को राम की बहन और श्रृंगी की पत्नी के रूप में विस्तृत कथा नहीं मिलती, जैसा कि बाद की परंपराओं में लोकप्रिय हुआ।
Raksha Bandhan 2026 : क्या शांता का कोई पुत्र था?
कुछ लोककथाओं में शांता और श्रृंगी के पुत्र का नाम लोमपाद या लोमश बताया जाता है। हालांकि इस संबंध में भी अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रीय परंपराओं में भिन्न विवरण मिलते हैं। इसलिए इसे निश्चित ऐतिहासिक तथ्य के बजाय प्रचलित कथा के रूप में देखना अधिक उचित है।
Raksha Bandhan 2026 : कुल्लू में आज भी होती है शांता और श्रृंगी की पूजा
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू क्षेत्र में शांता और ऋषि श्रृंगी से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं बेहद महत्वपूर्ण हैं। वहां दोनों को लेकर मंदिर और स्थानीय देव परंपराएं प्रचलित हैं। कुल्लू की धार्मिक संस्कृति में देव परंपरा का विशेष स्थान है। स्थानीय श्रद्धालु शांता और श्रृंगी को श्रद्धा से पूजते हैं और उनसे सुख-समृद्धि तथा परिवार के कल्याण की कामना करते हैं।
Raksha Bandhan 2026 : रक्षाबंधन पर क्यों याद आती है शांता की कहानी?
रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का पर्व है। ऐसे अवसर पर शांता की कथा हमें रामायण परिवार के उस पक्ष से परिचित कराती है, जिसके बारे में आमतौर पर कम चर्चा होती है। शांता की कहानी का सबसे बड़ा संदेश उनके पारिवारिक रिश्तों और जीवन में आए त्याग से जुड़ा है। प्रचलित कथाओं में वह ऐसी राजकुमारी के रूप में सामने आती हैं, जिन्होंने परिस्थितियों के अनुरूप अपना जीवन स्वीकार किया और आगे चलकर धार्मिक तथा सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
भगवान श्रीराम की बहन के रूप में शांता का उल्लेख भले ही मुख्य रामायण कथा में बहुत सीमित हो, लेकिन भारतीय लोक और धार्मिक परंपराओं में उनकी कहानी आज भी जीवित है।
इस रक्षाबंधन पर जब भाई-बहन के रिश्ते की बात हो, तो शांता की कथा यह याद दिलाती है कि परिवार की कहानी केवल उन किरदारों से नहीं बनती जो सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं। कई बार किसी परिवार के शांत और कम चर्चित सदस्य का जीवन भी त्याग, प्रेम और आस्था की बड़ी कहानी अपने भीतर समेटे होता है।




