Report: Farhan khan
Agra Government School आगरा के राजामंडी स्थित महाराजा सूरजमल इंटर कॉलेज की स्थिति सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। कभी सैकड़ों विद्यार्थियों से भरा रहने वाला यह विद्यालय आज महज 12 छात्रों तक सिमट गया है, जबकि यहां छह शिक्षक और एक प्रधानाचार्य सहित कुल सात शिक्षाकर्मी तैनात हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि विद्यालय पिछले लगभग 20 वर्षों से स्थायी बिजली कनेक्शन के बिना संचालित हो रहा है।
Agra Government School 12 छात्र, 7 शिक्षाकर्मी और घटती छात्र संख्या
महाराजा सूरजमल इंटर कॉलेज में छात्रों की संख्या लगातार घटती जा रही है। वर्तमान में विद्यालय में केवल 12 छात्र अध्ययनरत हैं, जबकि शिक्षण और प्रशासनिक कार्यों के लिए सात कर्मचारी नियुक्त हैं। स्थानीय स्तर पर इसे शिक्षा व्यवस्था की विफलता के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

विद्यालय प्रशासन का मानना है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश यहां कराने से बच रहे हैं।
Agra Government School बिजली नहीं, पानी और शौचालय व्यवस्था भी प्रभावित
विद्यालय में पिछले दो दशकों से स्थायी बिजली कनेक्शन नहीं होने के कारण कई आवश्यक सुविधाएं प्रभावित हैं। बिजली के अभाव में पेयजल व्यवस्था और शौचालयों के संचालन में भी कठिनाइयां आती हैं। इसके अलावा परिसर में बंदरों का आतंक भी छात्रों और शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।

कार्यवाहक प्रधानाचार्य सीमा सिंह के अनुसार, बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों को पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
Agra Government School परीक्षा केंद्र बनता है स्कूल, फिर भी नहीं मिली मूलभूत सुविधा
विडंबना यह है कि हर वर्ष इस विद्यालय को यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र बनाया जाता है। परीक्षा के दौरान सीसीटीवी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए पास के परिसर से अस्थायी बिजली की व्यवस्था की जाती है, लेकिन विद्यालय को स्थायी बिजली कनेक्शन अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।
विद्यालय प्रशासन का कहना है कि यदि बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं तथा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत मिले, तो छात्र संख्या में वृद्धि हो सकती है और संस्थान अपनी पुरानी पहचान वापस हासिल कर सकता है।
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



