प्रमोद श्रीवास्तव, विशेष संवाददाता
Datia Assembly By Election : मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार अपने अंतिम और सबसे आक्रामक चरण में पहुंच चुका है, जहां भारतीय जनता पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद कमान संभाल ली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दतिया के उदगवां और उपरायं गांवों में बड़ी जनसभाओं को संबोधित कर रहे हैं। सीएम ने मतदाताओं को सीधे साधने के लिए प्रबुद्धजीवियों और व्यापारियों के सम्मेलनों में हिस्सा लिया है। तो वहीं केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी ग्रामीण इलाकों में ताबड़तोड़ रैलियां कर केंद्र व राज्य सरकार के विकास कार्यों को सामने रखा है।


Datia Assembly By Election : मुख्यमंत्री ने संभाली कमान, जीत का पुख्ता इंतजाम
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ ही भाजपा ने क्षेत्र के सभी छह मंडलों में मंत्रियों को तैनात किया है और विधायकों को शक्ति केंद्रों का प्रभार सौंपा है। तो वहीं कांग्रेस की तरफ से मुख्य दावेदार, जिनके लिए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद माइक्रो-मैनेजमेंट संभाल रहे हैं।कांग्रेस ने भी दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारा, जीतू पटवारी के साथ कांग्रेस के दिग्गज मोर्चा संभाले हुए हैं।
Datia Assembly By Election : CM के निशाने पर कांग्रेस, 100 % बीजपी की जीत, भाजपा और कांग्रेस के लिए साख का सवाल उपचुनाव
बूथ स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं की फौज तैयार मैदान में हैं। उधर आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दमोदर यादव के मैदान में होने से चुनावी मुकाबला त्रिकोण होने के साथ ही जीत हार के समीकरणों को दिलचस्प बना रहा है। आज सीएम डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि कांग्रेस सिर्फ वोटों की चिंता करती है। जबकि भाजपा विकास का पर्याय है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी यहां भारी बहुमत से 100% जीत दर्ज करेगी।
मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा उपचुनाव का मुकाबला अपने अंतिम और सबसे आक्रामक चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां सभी दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मोर्चा संभालते हुए ताबड़तोड़ रैलियां और जनसभाएं की हैं, जबकि कांग्रेस की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद माइक्रो-मैनेजमेंट और चुनावी रणनीति की कमान संभाले हुए हैं।

सत्ताधारी दल जहां अपनी विकास योजनाओं और बूथ स्तर की मजबूत फौज के दम पर शत-प्रतिशत जीत का दावा कर रहा है, वहीं विपक्षी दल भी पूरी ताकत से मैदान में डटे हैं। इस बीच, आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी की मौजूदगी ने इस चुनावी लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है, जिससे हार-जीत के समीकरण बेहद दिलचस्प हो गए हैं। यह उपचुनाव दोनों ही प्रमुख दलों के लिए राजनीतिक साख का बड़ा सवाल बन चुका है।



