BY
Yoganand Shrivastava
Firozabad Child Murder Viraj Pathak Death Penalty उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की एक फास्ट ट्रैक अदालत (Fast Track Court) ने न्याय की एक बेमिसाल नजीर पेश की है। अदालत ने डेढ़ साल के मासूम बच्चे आरव की जमीन पर 8 बार पटक-पटककर बेरहमी से हत्या करने वाले कलयुगी चाचा (रिश्ते के देवर) विराज पाठक को दोषी करार देते हुए फांसी (सजा-ए-मौत) की सजा सुनाई है।
इस दिल दहला देने वाले नृशंस हत्याकांड के महज 40 दिनों के भीतर अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। त्वरित न्याय की इस कार्रवाई से मृत बच्चे की मां और स्थानीय जनता ने राहत की सांस ली है।
Firozabad Child Murder Viraj Pathak Death Penalty 30 मई को यादव कॉलोनी में हुआ था नृशंस हत्याकांड
यह पूरी वारदात फिरोजाबाद के शिकोहाबाद थाना क्षेत्र की है, जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था:
- दिनदहाड़े हत्या: जानकारी के अनुसार, सिरसागंज तहसील के बामई गांव की रहने वाली रति अपने डेढ़ वर्षीय बेटे आरव के साथ शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में थी। 30 मई 2026 की दोपहर को आरोपी ने सरेराह गली में मासूम बच्चे को पैर से पकड़कर हवा में उछाला और एक के बाद एक 8 बार पथरीली जमीन पर पटक दिया, जिससे बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई।
- वायरल हुआ था वीडियो: इस खौफनाक वारदात का सीसीटीवी (CCTV) वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसे देखकर लोगों का गुस्सा भड़क उठा था।
Firozabad Child Murder Viraj Pathak Death Penalty एकतरफा प्यार और सनक में उजाड़ी मां की गोद
पुलिस जांच और अदालती सुनवाई में इस खूनी खेल के पीछे की मुख्य वजह सामने आई:
- पारिवारिक विवाद: पीड़ित महिला रति की शादी बदायूं निवासी सुमित उर्फ प्रियंक से हुई थी, लेकिन आपसी घरेलू विवाद के कारण रति उससे तलाक (Divorce) लेना चाहती थी।
- शादी का दबाव और सनक: इसी दौरान रति के रिश्ते का देवर विराज पाठक (निवासी शेखुपुरा, बदायूं) उससे एकतरफा प्यार करने लगा। वह रति पर जबरन शादी करने का लगातार दबाव बना रहा था। विराज को लगता था कि रति का डेढ़ साल का बेटा आरव इस शादी के आड़े आ रहा है। इसी सनक और नफरत में उसने मासूम आरव को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की साजिश रची और उसे बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया।
Firozabad Child Murder Viraj Pathak Death Penalty पुलिस की त्वरित कार्रवाई: एनकाउंटर में पकड़ा गया था आरोपी
घटना वाले दिन ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त कार्रवाई की थी:
- मुठभेड़ में लगी थी गोली: 30 मई को वारदात को अंजाम देकर भाग रहे हत्यारे विराज पाठक को पुलिस ने घेराबंदी कर कुछ ही घंटों के भीतर एक मुठभेड़ (Encounter) के दौरान दबोच लिया था। इस जवाबी कार्रवाई में आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी थी।
- 40 दिन में चार्जशीट और फैसला: पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर त्वरित सुनवाई की मांग की। बच्चे की मां ने शुरू से ही आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की थी, जिसे अदालत ने फैक्ट्स और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर सही माना।
अदालत की सख्त टिप्पणी: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इस मामले को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में मानते हुए कहा कि एक मासूम और बेजुबान बच्चे की इस तरह निर्मम हत्या समाज के माथे पर कलंक है। ऐसे अपराधियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। कानून व्यवस्था को सुदृढ़ रखने और समाज में कड़ा संदेश देने के लिए दोषी विराज पाठक को फांसी की सजा का ऐलान किया जाता है।





