Report: Alok Bharadwaj
Education Department APAAR ID Enrollment: नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए दिन बीतते जा रहे हैं, लेकिन शिक्षा विभाग की कछुआ चाल के कारण हजारों मासूमों के भविष्य पर तलवार लटक गई है। माध्यमिक शिक्षा मंडल के कड़े रुख के बावजूद, धरातल पर प्रशासनिक अमला पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि नामांकन की अंतिम तिथि 31 जुलाई में अब महज 21 दिन शेष रह गए हैं, और जिले के लगभग 10 हजार बच्चे अभी भी ‘अपार ID’ (APAAR ID) न बनने के कारण एडमिशन से वंचित हैं। मंडल का साफ आदेश है कि बिना अपार ID के किसी भी छात्र का नामांकन नहीं होगा, ऐसे में इन बच्चों का पूरा साल बर्बाद होने की कगार पर है।

प्राचार्य महारानी लक्ष्मीबाई गर्ल्स स्कूल भिंड
Education Department APAAR ID Enrollment कछुआ चाल से बनता सिस्टम: 21 दिन शेष, 10 हजार छात्र अधर में
माध्यमिक शिक्षा मंडल ने स्पष्ट कर दिया है कि इस सत्र से डिजिटल पहचान के रूप में ‘अपार ID’ अनिवार्य होगी। इसके बिना किसी भी छात्र का डेटा पोर्टल पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। नामांकन की डेडलाइन 31 जुलाई तय की गई है। उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और केवल 21 दिन बचे हैं, लेकिन टारगेट अभी कोसों दूर है। तकनीकी खामियों, सर्वर डाउन होने की बहानेंबाजी और कछुआ गति से चल रहे काम के कारण 10 हजार छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। सवाल यह उठता है कि जब समय इतना कम था, तो विभाग ने पहले से युद्ध स्तर पर तैयारियां क्यों नहीं कीं?

Education Department APAAR ID Enrollment जिम्मेदार कौन? बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का खुला खेल
इस भारी लापरवाही का असली जिम्मेदार कौन है? क्या सारा दोष उन गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के अभिभावकों का है, जिन्हें इस नई डिजिटल व्यवस्था की ठीक से जानकारी तक नहीं दी गई? या फिर उन जिम्मेदार अधिकारियों का, जो एयरकंडीशंड कमरों में बैठकर सिर्फ कागजी आदेश जारी करते हैं? स्कूलों में शिविर लगाकर युद्ध स्तर पर ये आईडी बनाई जानी चाहिए थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। बिना किसी ठोस बैकअप प्लान के एक कड़ा नियम थोप दिया गया, जिसका खामियाजा अब उन मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है जो स्कूल की दहलीज पर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

Education Department APAAR ID Enrollment नियमों की सख्ती और धरातल की सुस्ती: क्या शून्य घोषित होगा सत्र?
माध्यमिक शिक्षा मंडल का सख्त आदेश अपनी जगह सही हो सकता है, लेकिन धरातल की सुस्ती को देखते हुए यह आदेश इन 10 हजार बच्चों के लिए अभिशाप बनता जा रहा है। यदि 31 जुलाई तक इन बच्चों की अपार ID जेनरेट नहीं हो पाती है, तो पोर्टल स्वतः बंद हो जाएगा। ऐसी स्थिति में इन बच्चों का यह पूरा शैक्षणिक सत्र ‘शून्य’ घोषित हो सकता है। अधिकारियों की इस घोर लापरवाही के कारण हजारों परिवारों में अपने बच्चों के करियर को लेकर हड़कंप मचा हुआ है, लेकिन प्रशासन अब भी गहरी नींद में सोया हुआ है।





