BY
Yoganand Shrivastava
LPG & Fuel Price Relief क्या है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ और भारतीय रसोई के लिए क्यों है यह इतना महत्वपूर्ण?
LPG & Fuel Price Relief भौगोलिक रूप से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ ओमान और ईरान के बीच स्थित एक बेहद संकरा समुद्री गलियारा है, जो पर्शियन गल्फ को अरब सागर से जोड़ता है। मात्र 33 किलोमीटर चौड़ा होने के बावजूद यह दुनिया का सबसे संवेदनशील तेल मार्ग है, जहाँ से वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल और करीब 55% रसोई गैस (LPG) विदेशों से आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा (60-65%) इसी खाड़ी मार्ग से होकर आता है। इस रूट के सुरक्षित होने से जहाजों को मिलने वाला भारी-भरकम ‘वॉर रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम’ और लॉजिस्टिक लागत खत्म हो जाएगी, जिससे भारत में गैस और तेल की इनपुट कॉस्ट काफी कम हो जाएगी। इसके परिणामस्वरूप देश के 30 करोड़ से अधिक एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों के दाम घटने और स्थिर होने की पूरी उम्मीद है।
LPG & Fuel Price Relief पेट्रोल-डीजल की कीमतों में नरमी से थमेगी चौतरफा महंगाई की रफ्तार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में शांति बहाल होते ही कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में गिरावट का रुख शुरू हो गया है। भारत के लिए कच्चे तेल के दामों में प्रति बैरल महज 1 डॉलर की कमी भी देश के हजारों करोड़ रुपये बचाती है। जब तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) को सस्ता क्रूड मिलेगा, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम कम होंगे, जिससे आम आदमी का मासिक फ्यूल बजट सुधरेगा। इसका दूसरा सबसे बड़ा फायदा ट्रांसपोर्ट सेक्टर को होगा; डीजल सस्ता होने से मालभाड़ा घटेगा। जब ट्रकों का किराया कम होगा, तो शहरों तक आने वाले अनाज, फल, सब्जियां और रोजमर्रा के एफएमसीजी (FMCG) उत्पाद सस्ते हो जाएंगे, जिससे आम जनता को हर मोर्चे पर महंगाई से बड़ी राहत मिलेगी।
LPG & Fuel Price Relief भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ताकत, रुपया होगा मजबूत
व्यापक आर्थिक स्तर (Macro-Economic Level) पर देखा जाए तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सामान्य होना भारत के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए किसी बूस्टर से कम नहीं है। वर्तमान में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का एक बहुत बड़ा हिस्सा केवल विदेशी तेल खरीदने में खर्च हो जाता है। कच्चे तेल के आयात बिल में कटौती होने से भारत का व्यापार घाटा और राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) नियंत्रण में रहेगा। इसका सीधा फायदा देश की मुद्रा को मिलेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया और अधिक मजबूत स्थिति में नजर आएगा।





