Report: Farhan khan
Court Orders Judicial Action उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा में कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली पुलिस खुद ही कानूनी शिकंजे में फंस गई है। आगरा के थाना सिकंदरा में अदालत के कड़े रुख के बाद दो उपनिरीक्षकों (दारोगा) सहित चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह पूरी कार्रवाई एक वृद्ध महिला की याचिका पर माननीय न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के बाद अमल में लाई गई है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) को आगामी एक महीने के भीतर चारों आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ संबंधित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है।
Court Orders Judicial Action वारंट तामील कराने के दौरान घर में तोड़फोड़ और मारपीट का आरोप
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब एक वृद्ध महिला ने अदालत में न्याय की गुहार लगाते हुए एक प्रार्थना पत्र (याचिका) दायर किया था। महिला का आरोप था कि उसके खिलाफ कोर्ट से वारंट जारी हुआ था, जिसे तामील कराने के लिए पुलिस टीम उसके घर पहुंची थी। आरोप के मुताबिक, घर में दाखिल होते ही पुलिसकर्मियों ने न केवल वहां जमकर तोड़फोड़ की, बल्कि बुजुर्ग महिला के साथ अभद्रता करते हुए उसके साथ बेरहमी से मारपीट भी की।
Court Orders Judicial Action मेडिकल रिपोर्ट में चोटों की पुष्टि के बाद कोर्ट ने दिखाए कड़े तेवर
Court Orders Judicial Action वृद्ध महिला की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने सबसे पहले उसका विस्तृत मेडिकल परीक्षण (Medical Examination) कराने के आदेश दिए थे। जब महिला की सरकारी मेडिकल रिपोर्ट सामने आई, तो उसमें उसके शरीर पर आई चोटों की स्पष्ट रूप से पुष्टि (चोट के निशान) हो गई। मेडिकल साक्ष्यों को देखने के बाद अदालत ने पुलिसिया बर्बरता पर सख्त नाराजगी जताई और तत्काल प्रभाव से दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का हुक्म सुनाया।
Court Orders Judicial Action दारोगा निलेश शर्मा और सुरजीत सिंह सहित चार पर मुकदमा दर्ज, जांच शुरू
अदालत के इसी कड़े आदेश के अनुपालन में थाना सिकंदरा में नामजद मुकदमा पंजीकृत किया गया है। इस एफआईआर में:
- दारोगा निलेश शर्मा (उपनिरीक्षक)
- दारोगा सुरजीत सिंह (उपनिरीक्षक)
- इसके साथ ही दबिश की टीम में शामिल 2 अज्ञात महिला पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है।
सिकंदरा थाना पुलिस ने चारों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर मामले की विभागीय और वैधानिक जांच शुरू कर दी है। कोर्ट के आदेशानुसार, पुलिस कमिश्नर को एक माह के भीतर इस पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट और की गई कार्रवाई का ब्यौरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।





