Pond Negligence : निस्तारी का मुख्य साधन बना बदहाली का शिकार
REPORT : AVINASH CHANDRA
Pond Negligence : छत्तीसगढ़ के जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) के अंतर्गत आने वाले नगर पंचायत झगड़ाखांड से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के वार्ड क्रमांक 13 में लाखों रुपए की लागत से बना तालाब आज प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की घोर अनदेखी का शिकार हो रहा है। यह तालाब स्थानीय ग्रामीणों के लिए केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि उनके दैनिक जीवन (निस्तारी) का एक बड़ा सहारा है। हर दिन सैकड़ो लोग यहाँ नहाने और कपड़े धोने के लिए आते हैं, लेकिन प्रशासन की लापरवाही के कारण वे दूषित पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं।
Pond Negligence : एक तालाब गंदगी से सराबोर, तो दूसरा मरम्मत के अभाव में सूखा
झगड़ाखांड के वार्ड क्रमांक 13 में दो तालाब स्थित हैं, जो न केवल गर्मी बल्कि हर मौसम में स्थानीय लोगों की निस्तारी का मुख्य माध्यम बने रहते हैं। लेकिन वर्तमान में इनकी स्थिति बेहद दयनीय है। पहला तालाब पूरी तरह से गंदगी और कचरे से पटा हुआ है। लोग इसी प्रदूषित और बदबूदार पानी में नहाने और कपड़े धोने को विवश हैं, जिससे बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। वहीं, इसके ठीक बगल में बना दूसरा तालाब तकनीकी खराबी के कारण अपनी उपयोगिता खो चुका है। यह तालाब कहीं से फूटा हुआ है, जिसके कारण इसमें पानी टिक ही नहीं पाता। नगर पंचायत प्रशासन के पास इस फूट को ठीक करने या तालाब की मरम्मत कराने का जैसे समय ही नहीं है। यह तालाब भी अब कचरा डंपिंग साइट में तब्दील होता जा रहा है।

Pond Negligence : स्वच्छ भारत अभियान की उड़ रही धज्जियां, जवाबदेही से भाग रहे जिम्मेदार
एक तरफ जहां देश भर में ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, वहीं झगड़ाखांड नगर पंचायत की यह तस्वीर इस अभियान की जमीनी हकीकत को बयां करती है। तालाबों की यह दुर्दशा देखकर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जिनकी जिम्मेदारी इन जलस्रोतों को सहेजने और साफ रखने की है, वे अपनी जवाबदेही से मुंह क्यों मोड़ रहे हैं? स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पंचायत प्रशासन को इसकी साफ-सफाई कराने की फुर्सत नहीं है। जब इस विषय में बात की जाती है, तो स्थानीय जनप्रतिनिधि फंड (पैसे) न होने का रोना रोते हैं और प्रशासन की अनदेखी का आरोप लगाकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

Pond Negligence : भविष्य के गर्त में सुधार की उम्मीद
लाखों रुपए की लागत से तैयार यह सरकारी संपत्ति आज अफसरों की उदासीनता के चलते बर्बाद हो रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस खबर के सामने आने के बाद क्या नगर पंचायत झगड़ाखांड प्रशासन की नींद टूटती है? वार्ड क्रमांक 13 के इन तालाबों का जीर्णोद्धार, मरम्मतीकरण और साफ-सफाई आखिर कब तक शुरू हो पाती है, या फिर स्थानीय लोग यूं ही नारकीय जीवन जीने को मजबूर रहेंगे, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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