BY
Yoganand Shrivastava
Bengaluru : कर्नाटक की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। बेंगलुरु में आयोजित कांग्रेस विधायक दल (CLP) की हाई-प्रोफाइल बैठक में डीके शिवकुमार को औपचारिक और सर्वसम्मति से नया नेता चुन लिया गया है। इस फैसले के साथ ही डीके शिवकुमार का कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। दिलचस्प बात यह रही कि खुद निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बैठक में शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी विधायकों ने एकमत से स्वीकार कर लिया। इससे पहले सिद्धारमैया ने सीएलपी लीडर के पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया था।

Bengaluru 3 जून को लोकभवन के ‘ग्लास हाउस’ में होगा शपथ ग्रहण
Bengaluru शपथ ग्रहण समारोह के स्थान और समय को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लग चुका है:

- तारीख और समय: डीके शिवकुमार आगामी बुधवार यानी 3 जून 2026 को दोपहर बाद शाम 4 बजकर 5 मिनट पर मुख्यमंत्री पद की गोपनीयता की शपथ लेंगे।
- समारोह का स्थान: यह भव्य लेकिन सादगीपूर्ण समारोह राजभवन/लोकभवन के ‘ग्लास हाउस’ के अंदर आयोजित किया जाएगा।
- सुरक्षा के चलते बदला फैसला: पहले चर्चा थी कि शपथ ग्रहण समारोह विधानसभा की भव्य सीढ़ियों (Grand Steps) पर होगा, लेकिन शहर में सुरक्षा, भारी भीड़ और ट्रैफिक जाम की संभावित समस्या को देखते हुए अंतिम समय में कार्यक्रम को लोकभवन के अंदर करने का निर्णय लिया गया।
Bengaluru राज्यपाल से मिलकर पेश करेंगे सरकार बनाने का दावा
प्रशासनिक प्रक्रिया: विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद डीके शिवकुमार जल्द ही राज्यपाल थावरचंद गहलोत से दोबारा मुलाकात कर आधिकारिक तौर पर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इससे पहले शनिवार को ही दिन में उन्होंने राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट भी की थी।
Bengaluru आलाकमान की सहमति और सिद्धारमैया का इस्तीफा
इस बड़े सत्ता परिवर्तन की पृष्ठभूमि पिछले कुछ दिनों से दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक तैयार हो रही थी:
- सिद्धारमैया का रुख: पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 28 मई 2026 को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनका यह कदम पूरी तरह स्वैच्छिक और पार्टी आलाकमान के आपसी सुझाव व फॉर्मूले पर आधारित है।
- दिल्ली में बनी थी सहमति: इस अंतिम निर्णय से ठीक पहले डीके शिवकुमार ने नई दिल्ली का दौरा कर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ लंबी मैराथन बैठकें की थीं, जिसके बाद इस फॉर्मूले पर अंतिम मुहर लगी।





