Owaisi का बयान- सड़क पर नमाज गलत है तो सभी धर्मों के जुलूसों और आयोजनों पर भी लागू हों समान नियम

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Owaisi: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक ईद मिलाप कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और धार्मिक आयोजनों को लेकर चल रही बहस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि सड़क पर नमाज अदा करने को गलत माना जाता है, तो सभी धर्मों के धार्मिक आयोजनों और जुलूसों पर भी एक जैसे नियम लागू होने चाहिए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि यह सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने, उसका प्रचार करने और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है।

Owaisi: अनुच्छेद 25 का जिक्र करते हुए कही यह बात

ओवैसी ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यदि किसी धार्मिक गतिविधि को सार्वजनिक स्थान पर करने पर आपत्ति जताई जाती है, तो वही मानदंड अन्य धर्मों के कार्यक्रमों पर भी लागू होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों के लिए समान नियम और समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

Owaisi: त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों की तुलना की

अपने संबोधन में ओवैसी ने कहा कि भारत में विभिन्न धर्मों के त्योहारों, शोभायात्राओं और जुलूसों के दौरान सड़कों का उपयोग किया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरे समुदायों के कार्यक्रमों के दौरान सड़कें इस्तेमाल होती हैं, तब वैसी आपत्तियां सामने क्यों नहीं आतीं जैसी नमाज के मुद्दे पर देखने को मिलती हैं। उनके मुताबिक यह स्थिति दोहरे मानदंडों की ओर संकेत करती है।

Owaisi: रमजान और शराब की दुकानों को लेकर भी रखा पक्ष

ओवैसी ने कहा कि यदि कुछ मौकों पर मांस की दुकानों को बंद करने की मांग की जाती है, तो फिर समान सिद्धांत के तहत रमजान के दौरान शराब की दुकानों को बंद करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी समुदाय के धार्मिक विश्वासों के संबंध में निर्णय लेते समय समानता और निष्पक्षता का पालन किया जाना चाहिए।

Owaisi: मांस और अंडे की बिक्री पर प्रतिबंधों पर सवाल

एआईएमआईएम प्रमुख ने कुछ राज्यों में धार्मिक आयोजनों के दौरान मांस, चिकन और अंडे की बिक्री पर लगाई जाने वाली अस्थायी रोक का भी उल्लेख किया। उन्होंने पूछा कि ऐसे प्रतिबंधों का आधार क्या है और क्या सभी समुदायों के लिए एक जैसे नियम लागू किए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार फैसलों में संतुलन की कमी दिखाई देती है।

Owaisi: अजान और नमाज को लेकर विवादों पर जताई चिंता

ओवैसी ने कहा कि समय-समय पर अजान और नमाज से जुड़े मुद्दे सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनते रहते हैं। उनका आरोप था कि विशेष रूप से रमजान और बकरीद जैसे मुस्लिम त्योहारों के आसपास इन विषयों को अधिक प्रमुखता से उठाया जाता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों पर चर्चा करते समय सभी समुदायों के प्रति समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

Owaisi: सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर चल रही है बहस

देश के कई हिस्सों में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना बताया गया है कि यातायात और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो। इसी पृष्ठभूमि में ओवैसी का यह बयान सामने आया है।

Owaisi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दिया था बयान

हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि नमाज को व्यवस्थित तरीके से अदा किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया था कि आवश्यकता पड़ने पर नमाज कई पालियों में आयोजित की जा सकती है ताकि आम लोगों को असुविधा न हो। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि प्रशासन पहले लोगों को समझाकर नियमों का पालन कराने का प्रयास करेगा।

Owaisi: पश्चिम बंगाल में ईद की नमाज को लेकर लिया गया फैसला

पश्चिम बंगाल में भी ईद की नमाज के आयोजन को लेकर प्रशासनिक निर्णय चर्चा में रहा। कोलकाता के रेड रोड पर होने वाली पारंपरिक नमाज को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का फैसला लिया गया ताकि सार्वजनिक सड़कों पर भीड़ और यातायात संबंधी समस्याओं से बचा जा सके। इस फैसले को लेकर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

धार्मिक जुलूसों और नमाज के बीच तुलना

ओवैसी ने कहा कि शुक्रवार या ईद के अवसर पर ही बड़ी संख्या में लोग नमाज के लिए एकत्रित होते हैं, जबकि यह रोजाना होने वाली स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग सभी धर्मों के बड़े त्योहार और सार्वजनिक आयोजन सड़कों पर दिखाई देते हैं। ऐसे में केवल एक समुदाय की धार्मिक गतिविधियों पर सवाल उठाना उचित नहीं माना जा सकता।

समान नियम और समान व्यवहार की मांग

अपने संबोधन के अंत में ओवैसी ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी धर्मों और समुदायों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में एक जैसे नियम लागू किए जाएं और किसी भी समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया न अपनाया जाए।

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