Lahore की सड़कों के पुराने नाम बहाल करने के फैसले पर पाकिस्तान सरकार बैकफुट पर, विरोध के बाद बदला रुख

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Lahore: पाकिस्तान की पंजाब सरकार एक बार फिर अपने फैसले को लेकर विवादों में घिर गई है। लाहौर की ऐतिहासिक पहचान को दोबारा जीवित करने के उद्देश्य से शुरू की गई सड़कों और इलाकों के पुराने नाम बहाल करने की योजना को फिलहाल टाल दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कट्टरपंथी समूहों और सोशल मीडिया पर विरोध बढ़ने के बाद सरकार ने अपने रुख में बदलाव किया है।

Lahore: नवाज शरीफ और मरियम नवाज की बैठक में हुई थी चर्चा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल (LHAR) की एक अहम बैठक में शहर की ऐतिहासिक विरासत को दोबारा सामने लाने को लेकर चर्चा हुई थी। इस बैठक की अध्यक्षता पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने संयुक्त रूप से की थी। बैठक में लाहौर और आसपास के इलाकों की सड़कों और गलियों के पुराने ऐतिहासिक नाम बहाल करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने की बात सामने आई थी।

Lahore: कई इलाकों के पुराने नाम बहाल करने पर विचार

प्रस्तावित योजना के तहत कई इलाकों और सड़कों के वर्तमान नामों की जगह पुराने नाम वापस लाने पर चर्चा हो रही थी। इनमें इस्लामपुर को कृष्ण नगर, जैन मंदिर चौक, संत नगर, धरमपुरा, लक्ष्मी चौक, डेविस रोड, क्वींस रोड और राम गली जैसे ऐतिहासिक नाम शामिल बताए जा रहे थे। इन नामों का संबंध विभाजन से पहले के लाहौर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से माना जाता है।

Lahore: विरोध के बाद सरकार ने बदला बयान

विवाद बढ़ने के बाद पंजाब सरकार ने अब अपने पहले के रुख से पीछे हटते हुए कहा है कि फिलहाल ऐसा कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। लाहौर के डिप्टी कमिश्नर कैप्टन आर. मोहम्मद अली एजाज ने कहा कि सरकार केवल इस विषय पर विचार कर रही है और अभी तक किसी नाम को आधिकारिक रूप से बदलने का फैसला नहीं हुआ है।

Lahore: चरमपंथी समूहों ने किया विरोध

सूत्रों के मुताबिक, कुछ कट्टरपंथी संगठनों और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों ने पुराने ‘हिंदू और सिख’ नामों की बहाली का विरोध किया। आलोचकों ने इसे धार्मिक मुद्दा बनाते हुए मरियम नवाज सरकार पर निशाना साधा। विरोध बढ़ने के बाद प्रशासन ने फिलहाल इस प्रक्रिया को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है।

Lahore: इतिहासकारों और विशेषज्ञों से मांगे गए थे सुझाव

LHAR की ओर से हाल ही में इतिहासकारों, वास्तुकारों, शहरी योजनाकारों और शिक्षाविदों की एक बैठक भी आयोजित की गई थी। इस बैठक में लाहौर की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने को लेकर सुझाव लिए गए थे। अधिकांश विशेषज्ञों ने शहर के पुराने नामों को दोबारा बहाल करने के पक्ष में राय दी थी।

Lahore: विभाजन से पहले की विरासत को सामने लाने की कोशिश

लाहौर कभी हिंदू, सिख और मुस्लिम संस्कृति का साझा केंद्र माना जाता था। विभाजन के बाद शहर के कई इलाकों और सड़कों के नाम बदले गए थे। अब पुराने नामों को बहाल करने की चर्चा को ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन विरोध के चलते मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है।

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