CBSE Evaluation System Controversy : पहली बार हर चौथे विद्यार्थी ने मांगी स्कैन कॉपी ,छात्रों के भविष्य से कब तक होता रहेगा खिलवाड़ ?
CBSE Evaluation System Controversy : देश की सबसे बड़ी स्कूली परीक्षा संस्था CBSE एक बार फिर सवालों के घेरे में है।12वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट के बाद अब मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों का दावा है कि स्कैन कॉपी में गड़बड़ी, ब्लर पेज, पोर्टल क्रैश और गलत मूल्यांकन जैसी समस्याओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें जो स्कैन कॉपी मिली, वह पढ़ने लायक ही नहीं थी। कुछ छात्रों का दावा है कि अपलोड की गई कॉपी उनकी असली उत्तर पुस्तिका ही नहीं है। ऐसे में सोशल मीडिया पर ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम यानी OSM की पारदर्शिता पर सवाल उठे। पोर्टल पर पेमेंट फेल, लॉगिन एरर और आवेदन जमा न होने जैसी शिकायतें भी लगातार सामने आईं। जिसके बाद इस बार बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी मांगी। जिसने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा मूल्यांकन प्रक्रिया से कमजोर हुआ है। छात्रों के भविष्य पर संकट मडराया हुआ है। CBSE की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता और तेजी था, लेकिन अब यही सिस्टम सवालों के घेरे में है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही क्या तकनीकी खामियों की कीमत छात्रों के भविष्य को चुकानी पड़ेगी ? इस मुद्दे को लेकर अब विपक्ष सरकार को घेर रहा है। सरकार जांच और कार्रवाई की बात कह रही है। लेकिन जो सबसे बड़ा सवाल है वो ये कि आखिर ये सब कब तक। क्योंकि ये कोई एक मामला नहीं, ये कोई पहली परीक्षा नहीं है। बल्कि सीधा सिस्टम पर सवाल है और सिस्टम सरकार के हाथों में हैं। ऐसे में सवाल सरकार की परीक्षा का है। जिम्मेदारी का है और कार्रवाई का। और सबसे बड़ा सवाल है भरोसे का… जिस पर खरा उतरना अब न केवल संस्थाओं की जिम्मेदारी है बल्कि सरकार की भी।।इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।।।
CBSE Evaluation System Controversy : देश की सबसे बड़ी शिक्षा संस्था सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेंकडरी एज्युकेशन यानी CBSE एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कॉपी जांच में लापरवाही, नंबरों की गड़बड़ी और रिजल्ट में भारी विसंगतियों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। कई छात्रों ने आरोप लगाया है कि जिन विषयों में उन्हें अच्छे नंबरों की उम्मीद थी, वहां बेहद कम अंक दिए गए। वहीं री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन के बाद नंबरों में बड़ा अंतर सामने आने से कॉपी जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थिति इतनी असामान्य हो गई कि इस बार CBSE परीक्षा के बाद रिकॉर्ड संख्या में विद्यार्थियों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी मांगी। आंकड़े बताते हैं कि लगभग हर चौथे विद्यार्थी ने स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।जिसके बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भरोसा कमजोर हुआ है।कम अंक आने, टॉपर छात्रों के अपेक्षा से कम प्रदर्शन और कई विषयों में नंबरों के बड़े अंतर ने विद्यार्थियों को अपनी कॉपी देखने के लिए मजबूर किया। पहले जहां छात्र केवल री-टोटलिंग तक सीमित रहते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में विद्यार्थी सीधे स्कैन कॉपी मांग रहे हैं, जिससे वे खुद जांच सकें कि कहीं उत्तर जांचने में लापरवाही तो नहीं हुई। छात्रों ने जो आरोप लगाए हैं उनमें………..
CBSE Evaluation System Controversy : अब एक और CBSE सिस्टम पर सवाल है तो वहीं शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं होगी तो इसका सीधा असर छात्रों के करियर और मानसिक स्थिति पर पड़ेगा।मामले को लेकर देशभर में अभिभावक सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कब तक होता रहेगा। तो वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने CBSE परीक्षा मूल्यांकन और नतीजों में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर एक वीडियो जारी कर मोदी सरकार और सिस्टम को निशाने पर लिया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि नए डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम, ऑन-स्क्रीन मार्किंग की वजह से लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और सरकार इस पर कोई जवाब नहीं दे रही है।सरकार के मंत्री भले ही जांच और कार्रवाई की बात करें लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या CBSE की मूल्यांकन प्रणाली भरोसेमंद है ? क्या कॉपी जांच में मानवीय लापरवाही हावी है ? या फिर डिजिटल मॉनिटरिंग के बावजूद सारा सिस्टम ही फेल है ? ऐसे में स्कूली शिक्षा व्यवस्था हो, नीट जेईई या फिर किसी भी तरह की प्रतियोगी परीक्षा, सरकार और बोर्ड की जवाबदेही पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। बहरहाल CBSE की कॉपी जांच को लेकर उठे सवाल केवल नंबरों का विवाद नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य, भरोसे और मानसिक दबाव से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुके हैं। अब देखने वाली बात होगी कि बोर्ड और सरकार इस पर क्या कदम उठाता है, और छात्रों का विश्वास कैसे बहाल करता है।
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