लहसुन की फसल को लगी शराब की लत !
आलोट से शैलेंद्र पारे की रिपोर्ट
रतलाम: शराब और मयखाने पीने पिलाने वालों में खूब मशहूर है, इसका नशा जितना मदहोश करता है उतनी ही बदनामी भी देता है। कहते हैं जो इसकी गिरफ्त में आया वो जान से भी गया। लेकिन क्या शराब किसी की जान भी बचाती है. जी हां.. ये अनोखा प्रयोग रतलाम जिले में हो रहा है। रतलाम के किसान शराब का उपयोग नशे के लिए नहीं बल्कि फसलों को बचाने के लिए कर रहे हैं।आलोट और आस पास के खेतों में लहलहाती लहसुन की फसलों को कीटों से बचाव के लिए देसी दारू का छिड़काव हो रहा है। किसानों का ये प्रयोग सफल भी है। किसानों का कहना है कि लहसुन की फसल पर देसी शराब का छिड़काव करने से फसल की रक्षा होती है, कीट और तमाम तरह की बीमारियों फसल के पास नहीं भटकती है। साथ ही उपज में भी बढ़ोत्तरी होती है।

दारू का छिड़काव जलेबी नामक रोग से बचाता है
धतुरिया गांव के किसान मोहन सिंह राठौर आगे बताते हैं कि देसी शराब के छिड़काव से लहसुन की फसल को जलेबी नामक रोग से बचाया जा सकता है। उनके अनुसार शराब में मौजूद तत्व फसल पर किसी भी प्रकार के कीड़ों या रोगों को पनपने नहीं देते। किसान इस तकनीक को प्राकृतिक और सुरक्षित भी मानते हैं।

कृषि विशेषज्ञ बोले नहीं है वैज्ञानिक आधार
उधर उद्यानिकी विभाग और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस पद्धति का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, विशेषज्ञों के अनुसार ये किसानों का व्यक्तिगत जुगाड़ है, जिसका लंबे समय तक प्रभाव अभी तक स्पष्ट नहीं है, इस तरीके से फसलों को कितना फायदा होगा, ये तो वक्त बताएगा, लेकिन अगर इस प्रक्रिया से फसल पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ा तो इसकी जिम्मेदारी भी किसानों की ही होगी।

उद्यानिकी विभाग के अधिकारी चाहे किसानों के इस प्रयोग को मान्यता दे या ना दें, चाहे इसका वैज्ञानिक आधार हो या ना हो, लेकिन यहां के किसानों के लिए लहसुन की पैदावार बढ़ाने में देसी दारू का देसी जुगाड़ बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है। यहां के किसान मानते हैं कि देसी दारू हजारों रुपए लीटर की कीटनाशक दवा से कहीं सस्ती है। अब सवाल ये है कि तात्कालिक रूप से किसानों का ये देसी जुगाड़ फायदे का सौदा हो सकता है लेकिन अगर सब्जी का जायदा बढ़ाने वाली लहसुन शराब के छिड़काव से अपने गुण बदल लेती है तो ये सेहत के लिए नुकसान दायक भी हो सकता है, इसलिए किसानों के इस प्रयोग के बारे में कृषि वैज्ञानिकों को जल्द से जल्द शोध करने की जरुरत है।
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