BY
Yoganand Shrivastava
Khabar hatke : मुंबई की श्वेता देसाई की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। कल तक लंदन के बड़े ऑफिसों में ‘बॉस’ बनकर करोड़ों का फैसला लेने वाली श्वेता आज मेलबर्न में दूसरों के अपार्टमेंट्स साफ कर रही हैं। लेकिन यह कहानी किसी मजबूरी की नहीं, बल्कि संघर्ष और स्वाभिमान की है।
Khabar hatke पति के करियर के लिए छोड़ी ‘मखमली’ जिंदगी
श्वेता देसाई लंदन में एक नामी कंपनी में ‘प्रोडक्ट हेड’ के पद पर तैनात थीं, जहाँ उनका सालाना पैकेज लगभग 1 करोड़ रुपये था। साल 2023 में जब उनके पति ‘देव’ को मेलबर्न में नौकरी मिली, तो श्वेता ने बिना किसी झिझक के अपनी जमी-जमाई नौकरी छोड़ दी। उन्हें उम्मीद थी कि उनके अनुभव के आधार पर ऑस्ट्रेलिया में भी उन्हें बेहतरीन काम मिल जाएगा, लेकिन मेलबर्न का जॉब मार्केट उम्मीदों के उलट निकला।
Khabar hatke जब मखमली हाथों ने उठाया डस्टर और झाड़ू
महीनों तक इंटरव्यू देने के बाद भी जब मनमुताबिक नौकरी नहीं मिली, तो श्वेता घर पर बैठने के बजाय काम की तलाश में निकल पड़ीं। उन्होंने एयरबीएनबी (Airbnb) फ्लैट्स की सफाई और मैनेजमेंट का काम शुरू किया। जो हाथ कल तक लैपटॉप पर चलते थे, वे अब चादरें बदलने, बर्तन धोने और सफाई करने लगे। श्वेता बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें अपनी पहचान खोने का डर लगा और लोग जब उनके काम के बारे में पूछते, तो उन्हें झिझक होती थी।
Khabar hatke संघर्ष से मिला बड़ा सबक: आत्मनिर्भरता ही असली इज्जत
श्वेता ने इस संघर्ष से सीखा कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। आज वह न केवल सफाई का काम कर रही हैं, बल्कि बच्चों को अंग्रेजी भी पढ़ाती हैं। साथ ही, उन्होंने ‘द रीबिल्ड रूम’ नाम की एक कम्युनिटी शुरू की है, जो विदेशों में अपनी पहचान तलाश रही महिलाओं की मदद करती है।
नोट : यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर तैयार की गई है, स्वदेश न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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