Chanakya Niti : आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में जीवन के लगभग हर पक्ष को छुआ है। चाणक्य नीति में बेटी के पिता को भी कई महत्वपूर्ण बताई गई हैं। अगर आपकी भी पुत्री है तो उसकी परवरिश करते समय आपको किन बातों का ख्याल रखना चाहिए इसके बारे में आज हम आपको जानकारी देंगे।

(1) नातिसनदति कन्या पिता यः स्वेच्छया चरेत’– चाणक्य नीति के इस श्लोक का अर्थ है कि पिता को कभी भी बेटी पर अनावश्यक रोक-टोक नहीं लगानी चाहिए। पिता का दायित्व है कि वो बेटी को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनाए। बेटी को हर बात के लिए रोकना-टोकना उसके असली व्यक्तित्व को दबा सकता है।
(2) ‘पिता धर्मः स्वयं रक्षेत् कन्या दृष्ट्या प्रभावति’- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि बेटी की अच्छी परवरिश के लिए पिता को अपने आचरण को भी सही रखना चाहिए। ऐसा इसलिए कि बेटी अपने पिता को पहला आदर्श और मार्गदर्शक मानती है। पिता अगर गलत आचरण करेगा तो इसका बुरा प्रभाव बेटी के व्यक्तित्व पर भी पड़ता है। ऐसा होने पर बेटी गलत दिशा में जा सकती है और परिवार बिखर सकता है।
(3) ‘कन्या रक्षा पिता धर्मः, यत्र न स्यात् तत्र दोषः’- आचार्य चाणक्य के अनुसार बेटी की सुरक्षा पिता का सबसे बड़ा धर्म होता है। इसलिए पिता को अपनी बेटी की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक सुरक्षा का हमेशा ध्यान रखना चाहिए। बेटी की रक्षा के लिए पिता को सतर्क रहने की सलाह चाणक्य देते हैं।
(4) ‘कन्या दानं विचार्यं स्यात् न त्वारया न चलस्ये’- चाणक्य नीति के अनुसार पिता को बेटी की शादी बहुत समझदारी के साथ करनी चाहिए। बेटी के विवाह से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करना चाहिए। जल्दबाजी में बेटी की शादी कभी नहीं करनी चाहिए। सही जीवनसाथी मिलने पर ही बेटी का विवाह करना चाहिए ताकि उसका भविष्य सुरक्षित हो और अच्छा वर मिलने से पारिवारिक जीवन में भी खुशियां रहें। वहीं पिता अगर अयोग्य वर से बेटी का विवाह करता है तो बेटी का परिवार बिखर सकता है।
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