Bhopal मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार किसानों को उनकी उपज का न केवल वाजिब दाम दिला रही है, बल्कि खेती की लागत घटाने के लिए आधुनिक तकनीक और आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है। कृषि मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने विभाग की उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि सरकार किसानों से किए हर संकल्प को धरातल पर उतार रही है।
Bhopal गेहूं खरीदी: MSP के साथ बोनस का डबल लाभ
सरकार ने इस वर्ष गेहूं उत्पादक किसानों को बड़ी राहत दी है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार किसानों को प्रति क्विंटल अधिक राशि मिल रही है:
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (2026-27): ₹2,585 प्रति क्विंटल (केंद्र सरकार द्वारा)।
- राज्य सरकार का बोनस: ₹40 प्रति क्विंटल।
- कुल खरीदी दर: ₹2,625 प्रति क्विंटल।
- पारदर्शिता: भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में सुनिश्चित किया गया है।
Bhopal ‘मुख्यमंत्री कृषक प्रोन्नति योजना’ और धान किसान
धान उत्पादक किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने विशेष वित्तीय मदद की व्यवस्था की है। इस योजना के तहत धान की खेती करने वाले पात्र किसानों को ₹4,000 प्रति हेक्टेयर की आर्थिक सहायता सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से दी जा रही है।
Bhopal खेती का आधुनिकीकरण: यंत्रों और सिंचाई पर भारी सब्सिडी
कृषि उत्पादन की लागत कम करने के लिए सरकार ई-कृषि यंत्र अनुदान योजना चला रही है:
- कृषि यंत्र: सुपर सीडर, रोटावेटर और कल्टीवेटर जैसे यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत का अनुदान।
- सिंचाई: ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम पर 55 प्रतिशत तक की सब्सिडी।
- सोलर पंप: पात्र किसानों को 90 प्रतिशत भारी अनुदान पर सोलर पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- कस्टम हायरिंग: प्रदेश में 2,500 केंद्र सक्रिय हैं, जहां से किसान मशीनें किराए पर ले सकते हैं।
Bhopal मिट्टी परीक्षण और उन्नत बीज की सुविधा
- निःशुल्क जांच: मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए विभाग निःशुल्क मिट्टी परीक्षण कर रहा है, ताकि किसान संतुलित उर्वरक का उपयोग कर सकें।
- बीज पर छूट: मूंग और उड़द के बीजों पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
- उन्नत किस्में: मक्का की ऐसी किस्में उपलब्ध कराई जा रही हैं जो प्रति हेक्टेयर 70 क्विंटल तक उत्पादन देने में सक्षम हैं।
Bhopal बीमा और बिजली की गारंटी
किसानों को खेती के लिए 10 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली की आपूर्ति की जा रही है। साथ ही, जायद फसलों को भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में लाया गया है। किसी भी नुकसान की स्थिति में 72 घंटे के भीतर सर्वे की व्यवस्था की गई है ताकि मुआवजा प्रक्रिया में देरी न हो।





