Bhopal मसाला फसलों के उत्पादन में हम अव्वल, उद्यानिकी फसलों के रकबे का करें विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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Bhopal मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की जलवायु उद्यानिकी फसलों के लिए अत्यंत अनुकूल है। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक उद्यानिकी क्षेत्र का रकबा बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर तक पहुँचाना है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मसाला, फल, फूल और औषधीय फसलों की अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडिंग की जाए ताकि किसानों को वैश्विक बाजार का लाभ मिल सके।

Bhopal जीआई टैग (GI Tag) से मिलेगी वैश्विक पहचान

प्रदेश के विशिष्ट उत्पादों को उनकी भौगोलिक पहचान दिलाने के लिए सरकार तेजी से कार्य कर रही है। जल्द ही इन उत्पादों को विशिष्ट टैग मिलेगा:

  • प्रमुख उत्पाद: जबलपुरी मटर, गुना का कुंभराज धनिया, बुरहानपुर का केला, रतलाम का रियावन लहसुन, खरगोन की मिर्च, इंदौर का मालवी आलू और छतरपुर का पान।
  • उद्देश्य: जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की मांग अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ेगी और किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे।

Bhopal सिंहस्थ-2028 और फूलों की खेती

उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए सरकार फूलों की खेती को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित कर रही है:

  • सेंटर फॉर एक्सीलेंस: उज्जैन के पास 19 एकड़ भूमि पर ‘सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर’ की स्थापना की जा रही है।
  • स्विट्जरलैंड जैसा मॉडल: धार जिले का रूपाखेड़ा गांव फूलों की खेती में अपनी विशेष पहचान बना रहा है, जिसे मुख्यमंत्री ने ‘स्विट्जरलैंड के गांव’ जैसी उपमा दी।

Bhopal उत्सवों के जरिए ब्रांडिंग: जून में ‘आम महोत्सव’

किसानों और उपभोक्ताओं को जोड़ने के लिए प्रदेश के विभिन्न शहरों में फसल आधारित महोत्सव आयोजित किए जाएंगे:

  • जून (भोपाल): आम महोत्सव (10 संभागों में आम के बाग लगाने का लक्ष्य)।
  • जुलाई (खरगोन): मिर्च महोत्सव।
  • सितंबर (बुरहानपुर): केला महोत्सव (तने से रेशा बनाने वाले उद्योगों को जोड़ा जाएगा)।
  • अन्य: इंदौर में सब्जी, ग्वालियर में अमरूद और संतरा महोत्सव भी आयोजित किए जाएंगे।

मध्यप्रदेश की स्थिति: उत्पादन में देश में स्थान

फसल/उत्पादनमध्यप्रदेश का उत्पादनदेश में स्थान
मसाला फसलें57.72 लाख मी. टनप्रथम
पुष्प उत्पादन4.88 लाख मी. टनतृतीय
सब्जी उत्पादन259.52 लाख मी. टनतृतीय
फल उत्पादन102.44 लाख मी. टनचतुर्थ

मखाना और सूक्ष्म सिंचाई का विस्तार

  • मखाना खेती: प्रदेश के 14 जिलों (नर्मदापुरम, जबलपुर, रीवा आदि) में मखाना उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस वर्ष 85 हेक्टेयर रकबे का लक्ष्य है, जिस पर केंद्र सरकार 40% अनुदान देती है।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर: प्रदेश की 40 नर्सरियों को ‘हाईटेक’ बनाया जा रहा है। साथ ही सागर और देवास में स्मार्ट बीज फार्म विकसित किए जा रहे हैं।

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