Report: Vandna Rawat
Lucknow : ताला नगरी के रूप में विख्यात अलीगढ़ की पारंपरिक पहचान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर महिला उद्यमी नीलम सिंह ने सफलता की एक नई इबारत लिखी है। योगी सरकार की ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना से संबल पाकर नीलम ने न केवल डिजिटल लॉक का अपना साम्राज्य खड़ा किया, बल्कि आपदा के समय में दर्जनों लोगों के लिए रोजगार के द्वार भी खोले।
आपदा को बनाया अवसर: कोविड काल में रखी स्टार्टअप की नींव
Lucknow नीलम सिंह ने अपने इस साहसिक सफर की शुरुआत वर्ष 2019 के अंत में की थी, जब पूरा देश कोविड महामारी की चुनौतियों से घिरने वाला था। आर्थिक अनिश्चितता के उस दौर में नीलम ने अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति के साथ मिलकर अलीगढ़ के पारंपरिक ताला उद्योग को डिजिटल स्वरूप देने का संकल्प लिया। उन्होंने “ओव्लॉक्स इंडिया” नाम से अपनी यूनिट शुरू की, जिसका उद्देश्य स्थानीय कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें उनके घर के पास ही सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना था।

सरकारी प्रोत्साहन से वैश्विक पहचान तक का सफर
Lucknow शुरुआती दौर में वित्तीय बाधाओं को दूर करने में उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों ने अहम भूमिका निभाई।
- वित्तीय सहायता: ओडीओपी योजना के तहत उद्योग विभाग के सहयोग से उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ, जिसमें लगभग 2.5 लाख रुपये की सब्सिडी भी शामिल थी।
- व्यावसायिक प्रगति: इस आर्थिक मदद ने व्यवसाय को वह रफ़्तार दी कि आज उनकी कंपनी का टर्नओवर 10 करोड़ रुपये के पार पहुँच चुका है।
- अंतरराष्ट्रीय मांग: अलीगढ़ में बने ये स्मार्ट लॉक आज न केवल भारतीय बाजारों में छाए हुए हैं, बल्कि विदेशों में भी निर्यात किए जा रहे हैं।
तकनीक और रोजगार का अनूठा संगम
Lucknow नीलम की यह यूनिट अलीगढ़ के पारंपरिक ‘हैंडमेड’ तालों को आरएफआईडी (RFID) कार्ड, मोबाइल ऐप और बायोमेट्रिक तकनीक से लैस डिजिटल लॉक में बदल रही है।
- बढ़ता रोजगार: जहाँ शुरुआत में मात्र 5-6 लोग कार्यरत थे, आज वहां 20 से 25 कर्मचारी काम कर रहे हैं।
- बेहतर आय: यहाँ काम करने वाले हुनरमंद युवा अपनी योग्यता के आधार पर प्रतिमाह 15 से 35 हजार रुपये तक कमा रहे हैं। नीलम का कहना है कि डिजिटल क्रांति ने न केवल काम को आसान बनाया है, बल्कि मजदूरों की आय और उनके जीवन स्तर में भी व्यापक सुधार किया है।





